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भारत में बेरोजगारी: अवसरों को साकार करने के लिए युवाओं को तैयार करें

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 19 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, जहां 68% जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। परंतु इसी ऊर्जा और जनसांख्यिकीय लाभ के बावजूद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) के अनुसार, 2022 में देश में बेरोजगारी दर 7.8% थी, जबकि युवाओं में यह दर 17% से अधिक रही।

सरकारी नौकरियों की कमी, औद्योगिक विकास की धीमी गति, और शिक्षा प्रणाली में कौशल विकास की कमी जैसे कारण इस समस्या को गहरा रहे हैं। ऐसे में, स्वरोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करना ही एकमात्र समाधान नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।

जब तक युवा खुद को पारंपरिक नौकरी पर निर्भरता से मुक्त नहीं करेंगे, तब तक बेरोजगारी की यह समस्या निरंतर बनी रहेगी। भारत की बेरोजगारी की समस्या केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है; यह देश के विकास और सामाजिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है।

देश के युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर वैश्विक औसत से कहीं अधिक है, जो दर्शाता है कि शिक्षा और रोजगार के बीच एक गहरी खाई मौजूद है। शिक्षा प्रणाली मुख्यतः सैद्धांतिक ज्ञान पर केंद्रित है, जबकि उद्योगों को व्यावहारिक कौशल की आवश्यकता होती है।

इस विसंगति के कारण लाखों युवा स्नातक होने के बाद भी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसके अलावा, औद्योगिक विकास की धीमी गति और सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या ने रोजगार के अवसरों को और कम कर दिया है। स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों के बावजूद, अधिकांश युवा अभी भी नौकरी की तलाश में लगे हुए हैं।

सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाएं जैसे 'मेक इन इंडिया' और 'स्टार्टअप इंडिया' का प्रभाव अभी तक सीमित दिखाई देता है। इसका मुख्य कारण है कि शिक्षा प्रणाली में उद्यमिता और नवाचार को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। बिना जोखिम लेने की मानसिकता और पारंपरिक नौकरी के प्रति आकर्षण ने भी इस समस्या को बढ़ावा दिया है।

जब तक युवा खुद को उद्यमी बनने के लिए तैयार नहीं करेंगे, तब तक रोजगार सृजन की संभावनाएं सीमित ही रहेंगी। बेरोजगारी की समस्या के पीछे कई कारण हैं, जिनमें शिक्षा प्रणाली का दोषपूर्ण होना, औद्योगिक विकास का अभाव और युवाओं की मानसिकता प्रमुख हैं।

शिक्षा प्रणाली मुख्यतः सैद्धांतिक ज्ञान पर आधारित है, जबकि उद्योगों को व्यावहारिक कौशल और तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच तालमेल की कमी के कारण युवाओं को नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

सरकार द्वारा शुरू की गई कौशल विकास योजनाएं जैसे 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' (पीएमकेवीवाई) का प्रभाव अभी तक प्रमुखता से दिखाई नहीं दे रहा है, क्योंकि इन योजनाओं तक पहुंच और गुणवत्ता में कमी है। औद्योगिक विकास में धीमापन भी बेरोजगारी का एक प्रमुख कारण है।

देश में पर्याप्त उद्योग स्थापित नहीं हो पा रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसरों में कमी आ रही है। इसके अलावा, सरकारी नौकरियों पर युवाओं की निर्भरता ने निजी क्षेत्र में रोजगार सृजन की गति को धीमा कर दिया है।

युवाओं की मानसिकता भी पारंपरिक नौकरियों तक ही सीमित है, जिसमें वे अपने कौशल को विकसित करने के बजाय नौकरी की तलाश में लगे रहते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए, युवाओं को उद्यमिता और कौशल विकास के प्रति प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि वे खुद के लिए रोजगार के अवसर सृजित कर सकें।

बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए सबसे पहले शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किया जाना चाहिए। शिक्षा को व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाया जाना चाहिए, ताकि युवा उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सकें।

इसके अलावा, सरकार को स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए, जिसमें उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हों।

युवाओं को भी अपने आप को पारंपरिक नौकरी पर निर्भरता से मुक्त करना होगा और खुद के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का प्रयास करना चाहिए। स्वरोजगार को अपनाने के लिए उन्हें मानसिक रूप से तैयार होना होगा, क्योंकि इसमें जोखिम भी शामिल है।

सरकार और निजी संगठनों को मिलकर इस दिशा में कार्य करना होगा, ताकि देश के युवाओं को उचित अवसर मिल सकें और वे देश के विकास में योगदान दे सकें। आखिरकार, बेरोजगारी की समस्या का समाधान केवल सरकार या नीति निर्माताओं तक सीमित नहीं है; यह एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी।

भारत में बेरोजगारी की वर्तमान दर क्या है? राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) के अनुसार, 2022 में देश की बेरोजगारी दर 7.8% थी, जबकि युवाओं में यह दर 17% से अधिक रही। हालांकि, विभिन्न राज्य और शहरों में यह दर भिन्न हो सकती है। बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?

सरकार ने 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना', 'मेक इन इंडिया', 'स्टार्टअप इंडिया' जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इसके अलावा, सरकार उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है। युवा स्वरोजगार को कैसे अपना सकते हैं?

युवा सरकारी और निजी संगठनों द्वारा संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा, वे उद्यमिता संबंधी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी और ऋण सुविधाओं का लाभ उठाकर वे अपने व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।