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भारत में बेरोजगारी: युवाओं के हाथों में हैं अवसर, मगर कौशल और स्वरोजगार की कुंजी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 19 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

भारत की युवा शक्ति: बेरोजगारी का संकट या अवसर का द्वार?

भारत दुनिया का सबसे युवा देश है—युवाओं की संख्या लगभग 60 करोड़ है, जो देश के कुल जनसंख्या का लगभग 45% है। मगर यही शक्ति आज बेरोजगारी के संकट का सामना कर रही है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के अनुसार, वर्ष 2021-22 में ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 10.5% और शहरी क्षेत्रों में 7.8% थी।

जबकि युवाओं (15-29 वर्ष) में यह दर और भी अधिक है। सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या और औद्योगिक विकास में सुस्ती के बीच, स्वरोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप संस्कृति युवाओं के लिए नए द्वार खोल रहे हैं। मगर क्या ये पर्याप्त हैं? क्या हमारी शिक्षा प्रणाली और सरकारी नीतियाँ युवाओं को इस बदलाव के लिए तैयार कर रही हैं?

वर्ष 2023 में आईएमएफ की एक रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में प्रति वर्ष 1.2 करोड़ युवा रोजगार बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, मगर केवल 5 लाख ही संगठित क्षेत्र में नौकरी पा रहे हैं। शेष युवा या तो असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं या बेरोजगार हैं।

सरकार की ओर से कौशल विकास योजनाओं जैसे 'स्किल इंडिया' और 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' (पीएमकेवीवाई) के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, मगर अधिकांश प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता।

स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों ने उद्यमिता को बढ़ावा दिया है, मगर पूंजी, बाजार तक पहुंच और जोखिम उठाने की क्षमता जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।

बेरोजगारी का मूल कारण: शिक्षा, कौशल और अवसरों का असंतुलन

भारत में बेरोजगारी की समस्या का मूल कारण शिक्षा प्रणाली और कौशल विकास के बीच का असंतुलन है। हमारी शिक्षा प्रणाली रटंत विद्या पर आधारित है, जिसमें रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल की कमी है।

उच्च शिक्षा संस्थानों से निकलने वाले लाखों स्नातक ऐसे पदों पर नौकरी की तलाश में रहते हैं, जिनके लिए उनकी योग्यता से अधिक अनुभव की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, इंजीनियरिंग और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के स्नातकों की संख्या तो बड़ी है, मगर उनके कौशल उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं।

दूसरा बड़ा कारण औद्योगिक विकास में सुस्ती है। हालांकि सरकार द्वारा 'मेक इन इंडिया' जैसे अभियानों को चलाया जा रहा है, मगर विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है। सेवा क्षेत्र में भी अधिकांश रोजगार असंगठित और कम वेतन वाले हैं।

इसके अलावा, श्रम बाजार में लिंग असमानता और सामाजिक पृष्ठभूमि भी बेरोजगारी को बढ़ाने वाले कारक हैं। सरकारी नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक है कि कई युवाओं को दशकों तक सरकारी पदों के लिए इंतजार करना पड़ता है।

स्वरोजगार और उद्यमिता: युवाओं के हाथों में अवसर की चाभी

बेरोजगारी की समस्या से निपटने का एकमात्र उपाय स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। भारत में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2023 में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन गया, जिसमें 1.2 लाख से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं।

इनमें से कई स्टार्टअप शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। मगर इन स्टार्टअप को सफल बनाने के लिए सरकारी सहायता, पूंजी तक पहुंच और बाजार की जानकारी जैसी सुविधाओं की आवश्यकता है।

सरकार द्वारा चलाई जा रही 'स्टैंडअप इंडिया' और 'मुद्रा योजना' जैसी पहलों ने छोटे उद्यमियों को ऋण उपलब्ध कराकर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद की है। मगर इन योजनाओं का लाभ अधिकांश युवाओं तक पहुंच नहीं पाता, क्योंकि उन्हें इन योजनाओं की जानकारी नहीं होती या फिर वे आवेदन प्रक्रिया को जटिल मानते हैं।

इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बाजारों और संसाधनों का उपयोग किया जाना चाहिए।

कौशल विकास: रोजगार की कुंजी या महज एक औपचारिकता?

कौशल विकास योजनाओं को सरकार द्वारा रोजगार के अवसर बढ़ाने के प्रमुख साधन के रूप में देखा जाता है। 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' (पीएमकेवीवाई) के तहत अब तक 1.2 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

मगर अधिकांश प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता, क्योंकि उनके कौशल उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होते या फिर उन्हें नौकरी देने वाले संगठन उन्हें अनुभव की कमी के कारण नियुक्त नहीं करते। कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, युवाओं को स्वतंत्र रूप से सीखने और नए कौशल अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स जैसे Coursera, Udemy और Byju’s जैसे प्लेटफॉर्म ने युवाओं के लिए सीखने के नए अवसर खोले हैं।

मगर इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने के लिए स्मार्टफोन और इंटरनेट की उपलब्धता आवश्यक है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी सीमित है।

सुझाव और आगे की राह: युवाओं को सशक्त बनाना ही समाधान

भारत में बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए सरकार, शिक्षा संस्थानों, उद्योगों और युवाओं को मिलकर काम करना होगा। सबसे पहले, शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लाकर उसे कौशल आधारित बनाया जाना चाहिए। स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रमों में व्यावहारिक कौशल, उद्यमिता और नवाचार को प्रमुखता दी जानी चाहिए।

इसके अलावा, सरकार को स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उद्यमियों को वित्तीय सहायता, बाजार तक पहुंच और मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए। दूसरा, सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय संसाधनों और बाजारों का उपयोग करना चाहिए।

कृषि आधारित उद्योग, हस्तशिल्प और लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। तीसरा, कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किया जाना चाहिए और युवाओं को निरंतर सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

अंत में, सरकार को नौकरी देने वाले संगठनों और शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना चाहिए, ताकि प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार मिल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: भारत में बेरोजगारी दर कितनी है? उत्तर: राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के अनुसार, वर्ष 2021-22 में ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 10.5% और शहरी क्षेत्रों में 7.8% थी। युवाओं (15-29 वर्ष) में यह दर और भी अधिक है, जो लगभग 20-25% तक पहुंच सकती है।

प्रश्न: सरकार बेरोजगारी कम करने के लिए क्या कर रही है? उत्तर: सरकार द्वारा 'स्किल इंडिया', 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई)', 'स्टैंडअप इंडिया', 'मुद्रा योजना' और 'मेक इन इंडिया' जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं।

इसके अलावा, स्टार्टअप इंडिया और Stand-Up India जैसी पहलों ने उद्यमिता को बढ़ावा देने में मदद की है। प्रश्न: क्या स्वरोजगार बेरोजगारी का स्थायी समाधान है?

उत्तर: स्वरोजगार बेरोजगारी का एक महत्वपूर्ण समाधान हो सकता है, मगर इसके लिए युवाओं को उद्यमिता कौशल, पूंजी तक पहुंच और बाजार की जानकारी जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है, मगर अभी भी इसमें सुधार की गुंजाइश है।

प्रश्न: कौशल विकास कार्यक्रमों का युवाओं को कितना लाभ मिल रहा है?

उत्तर: सरकार द्वारा चलाए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, मगर अधिकांश प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता, क्योंकि उनके कौशल उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होते या फिर उन्हें अनुभव की कमी के कारण नियुक्त नहीं किया जाता।

इसलिए, कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार डिजाइन किया जाना चाहिए।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।