भारत भवन में दो दिवसीय भारतीय मातृभाषा अनुष्ठान का शुभारंभ
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इस अवसर पर 19 पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला, संस्कृति संचालनालय के संचालक एन.पी. नामदेव, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी एवं दत्तोपंत ठेंगडी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा उपस्थित रहे।
वीर भारत न्यास एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री सारंग ने कहा कि किसी भी समाज और संस्कृति की मूल पहचान उसकी मातृभाषा में निहित होती है। भाषा के माध्यम से व्यक्ति अपनी परंपराओं, ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ता है। उन्होंने औपनिवेशिक काल की शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी शिक्षा पद्धति के प्रभाव से भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक दृष्टि को कमजोर करने का प्रयास हुआ।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को मातृभाषा आधारित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए मध्यप्रदेश में हिंदी माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू किए जाने का उल्लेख किया। मंत्री श्री सारंग ने युवाओं से अपनी भाषा, बोली और संस्कृति को आत्मसात कर वर्ष 2047 तक विकसित और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।