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भारत का Double Dhamaal, इधर वेनेजुएला के तेल के कुओं पर कब्जा, उधर रूस में मिला आयल जैकपॉट

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भारत का Double Dhamaal, इधर वेनेजुएला के तेल के कुओं पर कब्जा, उधर रूस में मिला आयल जैकपॉट

भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए दो सबसे बड़ी खबर आई हैं जिन्हें ऐतिहासिक कहना भी छोटा होगा। दुनिया के दो सबसे बड़े ऑयल हॉटस्पॉट रूस और वेनेजुएला में भारत ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने पश्चिमी देशों के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया।

एक तरफ जहां दुनिया को यह लग रहा था कि भारत का रूस में जो निवेश था वो डूब चुका है। वहां से भारत को अरबों डॉलर का जैकपॉट मिला है। दूसरी तरफ वेनेजुएला जहां भारत का पैसा सालों से फंसा था वहां अब भारत सिर्फ हिस्सेदारी नहीं बल्कि मालिक बनने जा रहा है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रोएन ऑयल रिजर्व है।

दुनिया का करीब 17% कच्चा तेल यही दबा है। भारत का ओएनgसी विदेश लिमिटेड ओवीएल ने यहां सालों पहले बड़ा निवेश किया था। अब वेनेजुएला की हिस्सेदारी से ओनरशिप तक का सफर कैसा रहा भारत का? चलिए मैं आपको बताता हूं। सबसे पहले बात सैन क्रिस्टोबॉल की। इसमें भारत की 40% हिस्सेदारी थी। दूसरा है काराबो वन।

इसमें ओवीएल, आईओसी और ऑयल इंडिया को मिलाकर 18% हिस्सा था। इसे भी पढ़ें: UK ने रूस की चेतावनी दरकिनार कर Ukraine को 100 प्रतिशत मदद का भरोसा दिया अमेरिकी प्रतिबंधों और वेनेजुला की आर्थिक बदहाली की वजह से यहां उत्पादन लगभग ठप हो गया। शून्य हो गया।

सैन क्रिस्टाबॉल से मात्र 10,870 बैरल और कारा बोबो से 970 बैरल प्रतिदिन निकल रहा था। जो कि ऊंट के मुंह में जीरे के समान था। अब हमारे 500 600 मिलियन के डिविडेंड्स वहां फंसे हुए थे। लेकिन अब पासा पलट गया। वेनेजुएला ने अपनी रणनीति बदल दी है।

अब वह विदेशी कंपनियों को सिर्फ शेयर नहीं दे रहे हैं बल्कि उन्हें ओनरशिप और ऑपरेटरशिप भी दे रहे हैं। इसका मतलब यह है कि अब ओएनजीसी वहां के कुओं से तेल निकालने का काम खुद कंट्रोल करेगी। अमेरिका ने भी इसके लिए विशेष लाइसेंस जारी कर दिया है।

बड़ी खबर है और यह भारत के लिए जैकपॉट इसलिए है क्योंकि अब वहां के ऑपरेशंस अपने हिसाब से हैंडल करेंगे। अपना फंसा हुआ पैसा तेल के रूप में वसूल पाएगा। रूस के सुदूरपुर में स्थित सखालीन वनकी कहानी किसी थ्रिलर फिल्म जैसी है।

साल 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ और रूस ने सखालिन वन के पूरे ढांचे को बदलकर एक नई रशियन कंपनी बना दी। शर्त यह रखी गई कि अगर विदेशी पार्टनर जैसे कि भारत की ओवीएल को अपना 20% स्टिक वापस चाहिए तो उन्हें फिर से पैसा देना होगा और वह भी रूसी रूबल में।

अब दुनिया को लगा कि भारत तो फंस गया गुरु लेकिन भारत ने यहां मास्टर स्ट्रोक खेल दिया। हमारे लगभग 800 मिलियन के डिविडेंड्स पहले से ही रूस में फंसे हुए थे। इसे भी पढ़ें: पुतिन-नेतन्याहू का पहली बार एक साथ बड़ा ऐलान, भारत हैरान! प्रतिबंधों के कारण हम उन्हें भारत नहीं ला पा रहे थे।

अब भारत ने रूस से कहा कि भाई वो पैसा जो वहां पर फंसा है उसे ही हमारे नए स्टेक की पेमेंट आप मान लीजिए। अब नतीजा क्या हुआ? नतीजा यह हुआ कि हमने बिना नया कैश खर्च किए अपना 20% स्टेक वापस पा लिया। और आज की खबर यह है कि वहां उत्पादन इतना जबरदस्त बढ़ चुका है कि हमारा वो निवेश अब डबल के पार हो चुका है।

अब आप सोच रहे होंगे कि दोस्तों कि इतनी दूर से तेल लाने का फायदा क्या है? देखिए भारत की असली ताकत हमारी रिफाइनरीज है। वेनेजुला का तेल हैवी क्रूड होता है जिस जिसे रिफाइन करना मुश्किल है।

लेकिन रिलायंस की जामनगर नायरा की वादीनार और आईओसी की पाराप रिफाइनी दुनिया की उन चुनिंदा जगहों में से हैं जो इस तेल को बड़ी आसानी से प्रोसेस कर सकती है। अब जब हमारे पास खुद की फील्ड्स होती हैं तो हम वैश्विक बाजार की कीमतों के उतार-चढ़ाव से बच जाते हैं और ये एनर्जी सिक्योरिटी का सबसे मजबूत स्तंभ है।

खैर दोस्तों ओएनgसी विदेश को धीमी कंपनी माना जाता था सालों से लेकिन वेनेजुला और रूस के इंटर्न अराउंड्स ने कंपनी का हौसला बढ़ा दिया।

📡 स्रोत: NewsData.io

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