भारत-कनाडा EFD संवाद में ऐतिहासिक सहमति: क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और फिनटेक में साझेदारी से बदलेगा वित्तीय ढांचा, अरबों डॉलर के निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को नई गति देने के उद्देश्य से आयोजित मंत्रिस्तरीय 'आर्थिक एवं वित्तीय संवाद' (Economic and Financial Dialogue - EFD) में दोनों देशों ने कई अहम और दूरगामी फैसले लिए हैं।
इस उच्चस्तरीय वार्ता में सीमा पार भुगतान प्रणाली (Cross-Border Payments), फिनटेक इनोवेशन, वित्तीय सेवाओं के आधुनिकीकरण और दोनों देशों के बीच संस्थागत पूंजी निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आयोजित यह बैठक दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी, व्यापार सुगमता और डिजिटल वित्तीय ढांचे के एकीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रही है।
क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और फिनटेक इनोवेशन में सहयोग का नया दौर इस संवाद का सबसे प्रमुख केंद्र बिंदु डिजिटल वित्तीय तकनीकों और सीमा पार भुगतान का सरलीकरण रहा। दोनों पक्षों ने भारत की उन्नत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और यूपीआई (UPI) तकनीक के साथ कनाडा के वित्तीय पेमेंट सिस्टम के संभावित इंटरलिंकेज पर सकारात्मक चर्चा की।
इस सहयोग का सीधा लाभ दोनों देशों के नागरिकों, विशेष रूप से कनाडा में रहने वाले विशाल भारतीय प्रवासी समुदाय (Diaspora), छात्रों और छोटे-मध्यम व्यापारिक प्रतिष्ठानों (MSMEs) को मिलेगा। इससे न केवल विदेशी धन प्रेषण (Remittances) की लागत में भारी कमी आएगी, बल्कि लेन-देन की गति रियल-टाइम में सुरक्षित और सुगम हो सकेगी।
दोनों देशों के फिनटेक स्टार्टअप्स और वित्तीय संस्थानों को एक-दूसरे के बाजारों में तकनीकी आदान-प्रदान और नए प्रयोगों के लिए रेगुलेटरी सपोर्ट देने पर भी सहमति बनी है।
कनाडाई पेंशन फंड्स और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश का रोडमैप भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल घरेलू बाजार को देखते हुए कनाडाई संस्थागत निवेशकों और पेंशन फंड्स (जैसे CPPIB, CDPQ) ने भारतीय बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़ाने पर गहरी रुचि दिखाई है।
संवाद के दौरान भारत ने अपने मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे (Macroeconomic Fundamentals), विनिर्माण क्षेत्र के लिए उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) में वैश्विक निवेशकों के लिए मौजूद अपार अवसरों को रेखांकित किया।
दोनों देशों ने निवेशकों के लिए पारदर्शी नीतियां, विवाद समाधान तंत्र और दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को सुरक्षा प्रदान करने वाले वित्तीय नियमों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया।
ग्रीन फाइनेंस और सस्टेनेबल क्लाइमेट प्रोजेक्ट्स पर फोकस जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के लिए ग्रीन और क्लाइमेट फाइनेंसिंग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड जुटाने हेतु सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स और ईएसजी (ESG) आधारित वित्तीय उत्पादों के विकास पर सहयोग करने का निर्णय लिया है।
वित्तीय नियामकों के बीच सस्टेनेबल फाइनेंस फ्रेमवर्क को एक समान बनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता साझा की जाएगी, जिससे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक निजी पूंजी को आकर्षित करना आसान होगा।
वित्तीय विनियमन और वैश्विक बहुपक्षीय मंचों पर साझा रुख भारत और कनाडा ने जी20 (G20), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड (FSB) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर साझा आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण (AML/CFT) से निपटने के लिए वित्तीय खुफिया इकाइयों (FIUs) के बीच रियल-टाइम सूचनाओं के आदान-प्रदान को और मजबूत करने पर सहमति बनी है।
इसके अतिरिक्त, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा के वित्तीय तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का मुकाबला करने के लिए साझा साइबर रक्षा तंत्र तैयार करने की दिशा में भी चर्चा आगे बढ़ी है।
व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती यह संवाद न केवल वित्तीय क्षेत्र के लिए, बल्कि दोनों देशों के समग्र व्यापारिक संतुलन और कूटनीतिक विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय और बैंकिंग चैनलों के सुगम होने से वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार में तेजी से उछाल आएगा। दोनों देशों के वित्त मंत्रालयों और केंद्रीय बैंकों की तकनीकी टीमें अब इन समझौतों के क्रियान्वयन के लिए एक संयुक्त कार्यबल (Joint Task Force) के तहत निरंतर काम करेंगी।
📡 स्रोत: NewsData.io