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भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे में शामिल होंगे 5 नए देश? फ्रांस ने दिल्ली में किया खुलासा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 7 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे में शामिल होंगे 5 नए देश? फ्रांस ने दिल्ली में किया खुलासा

India Middle East Europe Economic Corridor: भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारेक को लेकर हलचल तेज हुई है. अब इस योजना में 5 नए देश शामिल होना चाहते हैं. इसका खुलासा खुद फ्रांस ने किया है.

साल के अंत में मंत्रिस्तीय बैठक होने की उम्मीद जताई जा रही है. इससे पहले नए देशों की शामिल होने की इच्छा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बता दें कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए गेरार्ड मेस्ट्रेलेट को विशेष दूत बनाया है. मेस्ट्रेलेट 5 से 7 अक्टूबर तक भारत दौरे पर हैं.

विशेष दूत गेरार्ड मेस्ट्रेलेट ने मंगलवार को बताया कि मिस्र, लेबनान, ओमान, ग्रीस और साइप्रस ने इस परियोजना में शामिल होने में रुचि दिखाई है.

उन्होंने कहा कि आईएमईसी में नए देशों को शामिल करने पर चर्चा के लिए इस साल के अंत में मंत्रिस्तरीय बैठक होने की उम्मीद है. कैसे होगा फैसला?

दिल्ली दौरे के दौरान मेस्ट्रेलेट आईएमईसी परियोजना को आगे बढ़ाने और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में फ्रांस-भारत सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं.

मेस्ट्रेलेट ने कहा कि आईएमईसी के मौजूदा आठ सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष ही इस बात का फैसला करेंगे कि कॉरिडोर में नए देशों को शामिल किया जाए या नहीं.

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठक में आईएमईसी के दायरे को बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है.

ग्रीस और साइप्रस पूर्ण सदस्य बनने के इच्छुक मेस्ट्रेलेट ने बताया कि मिस्र, लेबनान और ओमान आईएमईसी के साथ काम करने या इसमें शामिल होने में रुचि रखते हैं.

वहीं, ग्रीस और साइप्रस भी इस परियोजना के पूर्ण सदस्य बनने के इच्छुक हैं.

मेस्ट्रेलेट के मुताबिक, ये दोनों यूरोपीय देश आईएमईसी में शामिल होने को लेकर खास तौर पर रुचि दिखा रहे हैं. जॉर्डन और इजरायल पर क्या है स्थिति? मेस्ट्रेलेट ने जॉर्डन और इजरायल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की.

उन्होंने कहा कि दोनों देश मूल आठ हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल नहीं हैं, लेकिन शुरुआती समझौते में उनका जिक्र किया गया था.

उनके मुताबिक, उस समय जॉर्डन और इजरायल के प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे, इसलिए उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे.

📡 स्रोत: NewsData.io

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