भारत की रक्षा ताकत को दोहरी मजबूती, ₹4106 करोड़ के दो बड़े सौदों पर मुहर
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16 अक्टूबर, नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना को नया संचार कवच मिलेगा। इस कवच से नौसेना की ताकत बढ़ेगी। समुद्र में दुश्मन की पनडुब्बियों को ध्वस्त करना और आसान हो जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने दोनों सेनाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए 4,106 करोड़ रुपये के दो बड़े रक्षा सौदों पर मुहर लगाई है। इनमें वायुसेना के लिए GSAT-7C संचार उपग्रह और नौसेना के लिए वरुणास्त्र हेवी वेट टॉरपीडो की खरीद शामिल है।
खास बात ये है कि दोनों सौदे स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अहम हैं। GSAT-7C संचार उपग्रह के लिए 2,563 करोड़ रुपये का अनुबंध न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ किया गया है... स्वदेशी तौर पर डिजाइन और विकसित ये उपग्रह वायुसेना के सैन्य संसाधनों के बीच सुरक्षित और निर्बाध संचार सुनिश्चित करने में मदद करेगा यानी ऑपरेशन के दौरान संचार व्यवस्था को और भरोसेमंद बनाने की दिशा में ये एक अहम कदम है।
अब बात नौसेना की... समुद्र में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे मुकाबला करने की क्षमता को मजबूती देने के लिए 1,543 करोड़ रुपये का वरुणास्त्र टॉरपीडो सौदा किया गया है... इसकी आपूर्ति भारत डायनेमिक्स लिमिटेड करेगी। स्वदेशी तकनीक से विकसित ये जहाज से दागी जाने वाली हेवी वेट टॉरपीडो है, जिसे नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला ने विकसित किया है।
इसकी उन्नत दिशा-परिवर्तन क्षमता लंबी दूरी पर दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाने में मदद करती है। इन दोनों रक्षा सौदों पर 15 अक्टूबर को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हस्ताक्षर किए गए। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इनसे न सिर्फ वायुसेना और नौसेना की परिचालन क्षमता मजबूत होगी, बल्कि घरेलू रक्षा विनिर्माण और महत्वपूर्ण तकनीकों में भारत की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
फाइल फोटो