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भारत की समंदर में बड़े स्तर पर खुदाई की तैयारी, खर्च होंगे 15000 करोड़, लेकिन क्यों?

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भारत की समंदर में बड़े स्तर पर खुदाई की तैयारी, खर्च होंगे 15000 करोड़, लेकिन क्यों?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और घरेलू स्तर पर तेल-गैस का उत्पाद बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाने की तैयारी कर रहा है.

सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने देश के समुद्री इलाकों में तेल और गैस की खोज तेज करने की प्लानिंग बनाई है.

कंपनी ने अगले अगले तीन सालों में डीपवॉटर और अल्ट्रा डीपवॉटर इलाकों में खोजी कुओं की खुदाई पर करीब 15,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

इसका खास मकसद समुद्र की गहराई में मौजूद तेल और गैस भंडार का पता लगाना और घरेलू उत्पाद को बढ़ाना है.

हालांकि, कंपनी की यह खोज अंडमान, कृष्णा-गोदावरी, महानदी और केरल-कोंकण जैसे तलछटी बेसिनों में की जाएगी. इसके लिए सरकार की समुद्र मंथन योजना से भी मदद मिलने वाली है.

ऐसे में आइए जानते हैं कि ऑयल इंडिया की यह पूरी योजना क्या है और इसका भारत को क्या फायदा हो सकता है.

गहरे समुद्र में क्यों होगी खुदाई?

ऑयल इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रंजीत रथ के मुताबिक, गहरे और अति-गहरे पानी में तेल की खोज काफी महंगी होती है.

इसलिए कंपनी सरकार की समुद्र मंथन पहल के मदद से गहरे और अति-गहरे पानी वाले इलाकों में खोज अभियान बढ़ाएगी.

इस योजना के तहत सरकार 2030-31 तक 84,084 करोड़ रुपये का खर्च करने की मंजूरी दे चुकी है. अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग लागत का 50% तक सरकार देगी. हालांकि, यह सहायता प्रति कुआं 675 करोड़ रुपये की सीमा तक होगी.

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विदेशों में भी तेल-गैस संपत्ति खरीदने की तैयारी

ऑयल इंडिया सिर्फ देश में ही तेल और गैस की खोज बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रही है.

कंपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विदेशों में भी तेल, गैस और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी संपत्तियां खरीदने के अवसर तलाश कर रही है.

कंपनी की मौजूदग

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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