भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अगली पीढ़ी के उपग्रह एनवीएस-3 का सफल प्रक्षेपण किया
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यह प्रणाली अमरीका की जीपीएस व्यवस्था का स्वदेशी विकल्प है। इस उपग्रह में भारत में बनाई गई परमाणु घड़ी लगाई गई है। इसके अलावा इसमें अन्य परमाणु घड़ियां भी हैं। उपग्रह में एल-5 और एस बैंड के साथ एल-1 आवृत्ति बैंड भी जोड़ा गया है। इससे नौवहन सेवाओं की क्षमता और बेहतर होगी। यह अभियान भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
इससे देश की, स्थान निर्धारण, मार्गदर्शन और सटीक समय बताने की क्षमता मजबूत होगी। इन सेवाओं का उपयोग आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा और सामरिक कार्यों में भी किया जा सकेगा। इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने इस अभियान की सफलता पर वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, औद्योगिक साझेदारों और शिक्षण संस्थानों को बधाई दी।
उन्होंने बताया कि लगभग दो हजार 232 किलोग्राम वजन के इस उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि लगातार दो जीएसएलवी अभियानों को केवल 56 दिनों के अंतराल पर पूरा किया गया है, जो अब तक का सबसे कम समय है।
मीडिया से बातचीत में डॉ. नारायणन ने बताया कि एनवीएस-03 के साथ भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु घड़ी भी अंतरिक्ष में स्थापित की गई है। इससे पहले दो स्वदेशी परमाणु घड़ियां अंतरिक्ष में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत की इस क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली का उद्देश्य देशभर में और भारत की सीमाओं से 15 सौ किलोमीटर तक सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसरो प्रमुख के अनुसार, इस प्रणाली के लिए कुल सात उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने की योजना है। उन्होंने यह भी बताया कि मोबाइल फोन में इन सेवाओं का व्यापक उपयोग शुरू करने के लिए सभी सात उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करना जरूरी है।