भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान में हिंदी पखवाड़ा 2026 का समापन, विजेताओं को मिले पुरस्कार
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हिंदी में सोचने और लिखने की जरूरत पर जोर, विशेषज्ञों ने कहा—राजभाषा हिंदी की सेवा केवल पखवाड़े तक सीमित न रहे
भोपाल। भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल में 13 अक्टूबर 2026 को हिंदी पखवाड़ा 2026 के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी के महत्व, राजभाषा के रूप में इसके प्रभावी उपयोग और भारतीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया गया। समारोह में हिंदी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वाराणसी के माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार शर्मा ने हिंदी साहित्य की प्राचीन परंपरा से आधुनिक हिंदी तक की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा का सही प्रयोग समाज में भ्रांतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. शर्मा ने रसखान, सूरदास, कबीर, तुलसीदास और मिर्जा गालिब जैसे साहित्यकारों की रचनाओं के उदाहरणों के माध्यम से हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी पखवाड़ा मनाना अच्छी पहल है, लेकिन हिंदी की सेवा केवल 15 दिनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हमें वर्ष के सभी 365 दिन हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए और हिंदी में सोचने तथा लिखने की आदत विकसित करनी चाहिए।
हिंदी हमारी सांस्कृतिक विरासत : डॉ. मनोरंजन मोहंती
संस्थान के निदेशक एवं हिंदी समिति के अध्यक्ष डॉ. मनोरंजन मोहंती ने हिंदी को देश की सांस्कृतिक विरासत और धरोहर बताया। उन्होंने मातृभाषाओं तथा क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन पर भी जोर दिया।
डॉ. मोहंती ने कहा कि मध्य क्षेत्र में कार्यरत संस्थान में हिंदी में काम करने को लेकर किसी प्रकार की झिझक नहीं होनी चाहिए। कार्यालयीन पत्राचार में हिंदी के उपयोग को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने संस्थान में राजभाषा संबंधी गतिविधियों की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इन प्रयासों से हिंदी को गति मिल रही है। उन्होंने भविष्य में भी इस दिशा में निरंतर काम करने के निर्देश दिए और सभी को शुभकामनाएं दीं।
राजभाषा नीति और ‘12 प्र’ पर डाला प्रकाश
समारोह के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल के उपनिदेशक (राजभाषा) राकेश कुमार कुशवाह ने संविधान में राजभाषा से संबंधित प्रावधानों और राजभाषा नीति के अंतर्गत ‘12 प्र’ की अवधारणा पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से विभिन्न विषयों को प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान में किए जा रहे हिंदी संबंधी कार्यों की सराहना करते हुए संस्थान को बधाई दी।
विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर किया सम्मानित
राजभाषा नीति के प्रेरणा एवं प्रोत्साहन आधारित स्वरूप को ध्यान में रखते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और संस्थान के निदेशक ने हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए। अतिथियों ने प्रतिभागियों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का समन्वय संस्थान की सहायक निदेशक (राजभाषा) सीमा ने किया। समारोह में हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, कार्यालयीन कामकाज में राजभाषा के प्रयोग को प्रोत्साहित करने और भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।