भोपाल

भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान में महिला किसान दिवस, 41 महिला किसानों ने साझा किए खेती के अनुभव

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 16 अक्टूबर 2026 👁️ 14 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान में महिला किसान दिवस, 41 महिला किसानों ने साझा किए खेती के अनुभव

भोपाल। कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को सम्मान देने और उन्हें वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल में 14 और 15 अक्टूबर को महिला किसान दिवस के अंतर्गत विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें भोपाल जिले की 17 और सीहोर जिले की 24 सहित कुल 41 महिला किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य महिला किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण और संतुलित उर्वरक उपयोग के व्यावहारिक तरीके समझाना था। संस्थान के निदेशक डॉ. मनोरंजन मोहंती ने कृषि में महिला किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्हें टिकाऊ कृषि के लिए वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

‘मेरी कहानी, मेरी खेती’ के माध्यम से अनुभव साझा

कार्यक्रम की विषयवस्तु ‘मेरी कहानी, मेरी खेती’ के अंतर्गत महिला किसानों ने अपने कृषि अनुभव, उपलब्धियां और उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के दौरान आने वाली चुनौतियां साझा कीं। उनके साक्षात्कार, सफलता की कहानियों और सुझावों का दस्तावेजीकरण किया गया, जिससे भविष्य में अनुसंधान और कृषि प्रसार गतिविधियों को दिशा मिल सके।

जैविक खाद और अपशिष्ट प्रबंधन की जानकारी

महिला किसानों को संस्थान द्वारा विकसित फैमिली नेट वेसल कम्पोस्टिंग विधि की जानकारी दी गई। इसके माध्यम से रसोई और कृषि अपशिष्ट को जैविक खाद में बदलने की प्रक्रिया समझाई गई। केंचुआ खाद निर्माण का प्रदर्शन कर बताया गया कि जैविक संसाधनों के पुनर्चक्रण से मृदा उर्वरता बनाए रखने के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाएं भी विकसित की जा सकती हैं।

संतुलित उर्वरक उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण

कार्यक्रम में संस्थान की ई-फार्म्स (उर्वरक सलाह एवं संसाधन प्रबंधन प्रणाली) के बारे में जानकारी दी गई। यह प्रणाली खेत की परिस्थितियों और फसल की आवश्यकताओं के अनुरूप उर्वरक उपयोग संबंधी सुझाव प्रदान करती है।

इसके अलावा वैज्ञानिक तरीके से मृदा नमूने लेने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग और लीफ कलर चार्ट (एलसीसी) के माध्यम से फसलों में पोषक तत्वों के प्रबंधन का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। किसान-वैज्ञानिक संवाद के दौरान स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल मृदा प्रबंधन पद्धतियों पर चर्चा हुई।

महिला किसानों को एकल-उपयोग प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने और अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा करने के लिए भी प्रेरित किया गया। कार्यक्रम ने वैज्ञानिक सिफारिशों और महिला किसानों के व्यावहारिक ज्ञान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का अवसर प्रदान किया।

S
Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।