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भारतीय रेलवे का मिशन: माल ढुलाई से ₹1.89 लाख करोड़ राजस्व का लक्ष्य

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भारतीय रेलवे का मिशन: माल ढुलाई से ₹1.89 लाख करोड़ राजस्व का लक्ष्य

भारतीय रेलवे का मिशन: माल ढुलाई से ₹1.89 लाख करोड़ राजस्व का लक्ष्य पारादीप पोर्ट की रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने पर ₹3,300 करोड़ खर्च होंगे, 98 किमी रेल लाइन का होगा विस्तार नई दिल्ली, 19 अगस्त। भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई से होने वाली आय बढ़ाने और देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है।

इसी के तहत ओडिशा के पारादीप पोर्ट की रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए करीब ₹3,300 करोड़ की लागत से 98 किलोमीटर रेल लाइन का विस्तार किया जाएगा। रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 में माल ढुलाई से ₹1.89 लाख करोड़ राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है।

यह पिछले वित्त वर्ष में हासिल ₹1.78 लाख करोड़ की तुलना में करीब 5.8 प्रतिशत अधिक है। 1.76 अरब टन माल ढुलाई का लक्ष्य रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 में 1.76 अरब टन माल ढुलाई का लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे ने करीब 1.67 अरब टन माल ढुलाई की थी।

दीर्घकालिक योजना के तहत रेलवे ‘मिशन 3000’ पर भी काम कर रहा है। इसके तहत वर्ष 2030-31 तक वार्षिक माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाकर 3 अरब टन करने का लक्ष्य रखा गया है।

पारादीप पोर्ट के लिए दो बड़ी परियोजनाएं देश के प्रमुख मालवाहक बंदरगाहों में शामिल पारादीप पोर्ट की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए दो प्रमुख रेल परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। हरिदासपुर-पारादीप रेल लाइन: करीब 53 किलोमीटर लंबी मौजूदा सिंगल लाइन को डबल किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग ₹1,100 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

इसकी डीपीआर को मंजूरी मिल चुकी है। कटक-पारादीप रेल लाइन: करीब 45 किलोमीटर लंबे मार्ग पर मौजूदा डबल लाइन के स्थान पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹2,210 करोड़ है। दोनों परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

रेलवे की योजना है कि करीब 90 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद ही निर्माण के लिए टेंडर जारी किए जाएं। पारादीप पोर्ट ने संभाला 156.45 मिलियन टन माल पारादीप पोर्ट ने वित्त वर्ष 2025-26 में 156.45 मिलियन टन माल संभालकर रिकॉर्ड बनाया। पोर्ट से बड़ी मात्रा में कोयला और लौह अयस्क सहित विभिन्न वस्तुओं का परिवहन होता है।

रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से बंदरगाह से माल की आवाजाही तेज होने और लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की उम्मीद है। इससे औद्योगिक इकाइयों और निर्यात कारोबार को भी फायदा मिल सकता है। 12 प्रमुख बंदरगाह रेल नेटवर्क से जुड़े देश में 226 मान्यता प्राप्त बंदरगाह हैं, जिनमें 69 पूरी तरह कार्यरत बताए गए हैं।

इनमें 12 प्रमुख बंदरगाह सीधे रेल नेटवर्क से जुड़े हैं। पूर्वी तट पर कोलकाता/हल्दिया, पारादीप, विशाखापत्तनम, एन्नोर, चेन्नई और तूतीकोरिन तथा पश्चिमी तट पर कोचीन, न्यू मैंगलोर, मुरमुगाओ, मुंबई, न्हावा शेवा और कांडला प्रमुख हैं।

रेलवे का जोर बंदरगाहों तक बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के साथ माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने और देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक कुशल बनाने पर है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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