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भारतीय रिज़र्व बैंक ने साइबर धोखाधड़ी और विवादित लेनदेन पर रोक के संबंध में नई रूपरेखा का मसौदा किया जारी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भारतीय रिज़र्व बैंक ने साइबर धोखाधड़ी और विवादित लेनदेन पर रोक के संबंध में नई रूपरेखा का मसौदा किया जारी

भारतीय रिज़र्व बैंक ने साइबर धोखाधड़ी और विवादित लेनदेन पर रोक के संबंध में नई रूपरेखा का मसौदा जारी किया है। इसके तहत बैंक पूरे अकाउंट के बजाय सिर्फ़ विवादित लेनदेन की राशि पर ही अस्थायी रूप से रोक लगा सकेंगे। ऐसा तभी किया जा सकेगा जब एक हजार रुपये या उससे अधिक के असामान्य अंतरण के म्यूल अकाउंट या साइबर फ्रॉड से जुड़े होने की आशंका हो।

बैंकों को अचानक, ग्राहक की बताई गई प्रोफ़ाइल के लिए अनुपयुक्त, या ज्ञात साइबर-फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े अंतरण की पहचान करने के लिए एआई-आधारित लेनदेन की निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल करना होगा। मसौदा निर्देश अगले वर्ष पहली अप्रैल से लागू होने वाले हैं, लेकिन बैंक इन्हें पहले भी अपना सकते हैं।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

भारतीय रिज़र्व बैंक ने साइबर धोखाधड़ी और विवादित लेनदेन पर रोक के लिये नई रूपरेखा का मसौदा जारी किया है। इस योजना के अंतर्गत बैंक पूरे खाते पर रोक लगाने के बजाय केवल विवादित लेनदेन की राशि पर ही अस्थायी रोक लगा पाएंगे, जब वह राशि एक हजार रुपये या उससे अधिक हो और साइबर फ्रॉड का संदेह हो। यह कदम बैंकिंग सुरक्षा को सुदृढ़ करने और ग्राहकों के खातों को अनधिकृत ट्रांसफर से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है। सामान्य जनता पर इसका असर यह होगा कि धोखाधड़ी के मामलों में उनके खातों की सुरक्षा बढ़ेगी, जबकि वैध लेनदेन

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।