भर्ती घोटाले की जांच का दायरा बढ़ा, ED के रडार पर कई KPSC परीक्षाएं
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की वेटरिनरी डॉक्टर भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की प्रवर्तन निदेशालय (ED) हिरासत आठ दिन और बढ़ा दी गई है.
विशेष PMLA अदालत ने उन्हें 3 अक्टूबर तक ED की हिरासत में भेजा है.
एजेंसी ने अदालत को बताया कि गंगवार से पूछताछ में जांच का दायरा केवल 400 वेटरिनरी अधिकारियों की भर्ती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि KPSC की कई अन्य परीक्षाओं में भी कथित रिश्वतखोरी और चयन में हेरफेर के संकेत मिले हैं.
ED ने शनिवार को अदालत में अपनी जांच से जुड़े दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में पेश किए.
एजेंसी के मुताबिक, एक KPSC अधिकारी के ठिकाने से मिले दस्तावेज और अन्य सामग्री के विश्लेषण में दूसरी परीक्षाओं के लिए भी अधिकारियों को कथित भुगतान के संकेत मिले हैं.
एजेंसी का दावा है कि पूछताछ के दौरान गंगवार ने कई अधिकारियों द्वारा परीक्षा और इंटरव्यू के चरणों में उम्मीदवारों के चयन में मदद के लिए रिश्वत लेने की जानकारी दी है.
70-80 सवाल पेन ड्राइव से देने का आरोप
ED के अनुसार, गंगवार ने पूछताछ में स्वीकार किया कि 8 और 9 जनवरी को हुई वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के करीब 70-80 सवाल और उनके उत्तर उसने 7 जनवरी को पेन ड्राइव के जरिए बिचौलिए बसवराज कन्नाले तक पहुंचाए थे.
गंगवार के मुताबिक उसे लगा था कि सवाल एक-दो लोगों तक पहुंचेंगे, लेकिन बाद में पता चला कि कन्नाले ने इन्हें करीब 10 उम्मीदवारों तक पहुंचाया.
रिश्तेदारों के खातों में 26 लाख जमा कराने का दावा
एजेंसी ने आरोप लगाया कि गंगवार ने पिछले वर्ष अपने दो रिश्तेदारों के बैंक खातों में कुल 26 लाख रुपये जमा करवाए, लेकिन रकम के स्रोत की संतोषजनक जानकारी नहीं दी.
ED अब इन लेन-देन को कथित अपराध से हुई आय से जोड़कर जांच कर रही है.
20 अभ्यर्थियों से 20-40 लाख तक वसूली का आरोप
ED ने अदालत को बताया कि बिचौलिया बसवराज कन्नाले ने
📡 स्रोत: ABP Live
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
भर्ती घोटाले की जाँच से हमें यह सिखने को मिलता है कि सच्ची प्रगति भ्रष्टाचार के बिना संभव है। जब किसी भी पद के लिए योग्यता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाती है, तो समाज में विश्वास और समर्पण की भावना बढ़ती है। इस घटना से यह स्पष्ट है कि हमें अपने संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए जागरूकता, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों पर आधारित कार्यवाही करनी चाहिए।