भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार के तंत्र पर उठाए सवाल
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Short Headline: भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार के तंत्र पर उठाए सवाल
Synopsis: भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार के तंत्र पर उठाए सवाल, पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग।
Category: Government , Planning , Politics , Youth , Student
Deadline : 19 SEPTEMBER, RANCHI
19 सितंबर, रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले में सरकार की ओर से अदालत में लगातार बदलते हलफनामे पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी, तो पहले के हलफ़नामों का सच क्या था? जवाबदेही सिर्फ़ नीचे वालों की, संरक्षण ऊपर वालों को क्यों?
श्री मरांडी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि राज्य सरकार की ओर से कल हाई कोर्ट में दाख़िल हलफ़नामे में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को दूषित बताया गया है। जब सरकार ख़ुद यह स्वीकार कर रही है, तो सवाल उठता है कि सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक की इस चौकड़ी की भूमिका और जवाबदेही की जाँच क्यों न हो? पहले न्यायालय के सामने पूरे तथ्य क्यों नहीं रखे गए? क्या अदालत को गुमराह करने की कोशिश हुई थी?
उन्होंने कहा कि जाँच को पहले ग़लत दिशा में ले जाने और “गड़बड़ी नहीं हुई” का दावा करने के आरोपों का जवाब कौन देगा? इस आशय का शपथपत्र किसके कहने पर और किसे बचाने के लिए दाख़िल किया गया? पहले की जाँच में अनुराग गुप्ता की भूमिका और बाद में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत जानकारी को लेकर मनोज कौशिक की जवाबदेही कैसे टाली जा सकती है? एक ही परीक्षा को लेकर पहले की सफ़ाई और अब की स्वीकारोक्ति के बीच का अंतर महज़ भूल है या किसी को बचाने की कोशिश?
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही का है। क्या उनकी जानकारी और सहमति के बिना इतना बड़ा खेल संभव था? यदि सरकार को जानकारी नहीं थी, तो शासन और निगरानी कहाँ थी? यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? माननीय न्यायालय को इस पूरे पहलू का भी संज्ञान लेना चाहिए।
उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा है कि क्या इतना व्यापक बहाली घोटाला अब तक पकड़े जा रहे निचले स्तर के लोगों के अकेले के बस की बात थी? यदि पूरी बहाली व्यवस्था वही संचालित कर रहे थे, तो अध्यक्ष और सचिव किस काम के लिए बैठाए गए थे? अधिकार और सुविधाएँ ऊपर वाले भोगें, लेकिन जवाबदेही के समय केवल नीचे वाले पकड़े जाएँ, यह कैसा न्याय है?
उन्होंने कहा कि जब पूरी परीक्षा प्रक्रिया ही दूषित थी, तो सीआईडी की पहले की जाँच में यह सच सामने क्यों नहीं आया? आज भी आशंका यही है कि न्यायालय के सामने उतने ही तथ्य रखे जाएँगे, जितने से प्रभावशाली लोगों की कथित संलिप्तता पर पर्दा बना रहे। सीआईडी के कामकाज पर सवाल इतना गंभीर है कि पूछना पड़ रहा है कि वह निष्पक्ष जाँच एजेंसी की भूमिका निभा रही है या संरक्षण और कथित वसूली के आरोपों से घिरे तंत्र की ढाल बन गई है? जिस जाँच की निष्पक्षता स्वयं सवालों के घेरे में हो, उसी के भरोसे लाखों छात्रों का भविष्य कैसे छोड़ा जा सकता है?
श्री मरांडी ने फिर दुहराया कि झारखंड के लाखों छात्रों को न्याय दिलाने के लिए इस पूरे मामले की CBI से निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच कराई जानी चाहिए। जेएसएससी और जेपीएससी जैसी भर्ती संस्थाओं की साख भाषणों, सफ़ाई और बदलते हलफ़नामों से वापस नहीं आएगी। वह तभी बहाल होगी, जब पूरी सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर उनके पद तथा पहुँच की परवाह किए बिना कार्रवाई होगी।
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट रूप से माँग किया है कि प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को जेएसएससी से तत्काल हटाया जाए तथा मनोज कौशिक को सीआईडी एडीजी के पद से हटाया जाए। अनुराग गुप्ता सहित उन सभी अध्यक्षों और ज़िम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जाँच हो, जिनके कार्यकाल में यह कथित बहाली घोटाला हुआ। जिनके ख़िलाफ़ साक्ष्य मिलें, उन्हें अभियुक्त बनाया जाए और क़ानून के अनुसार गिरफ़्तारी तथा अभियोजन की कार्रवाई हो। किसी को भी पद, प्रभाव या पुराने संबंधों के सहारे जाँच को बाधित करने का अवसर न मिले।
उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य दाँव पर लगाकर कुर्सियाँ बचाने का खेल बंद होना चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी, तो उसे दूषित करने और उस पर पर्दा डालने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी कुर्सी पर बैठे हों!
💡 पृष्ठभूमि (Background)
भर्ती परीक्षा गड़बड़ी के मामले में प्रतिपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार के तंत्र पर सवाल उठाए और पूरी तरह से सीबीआई जांच की मांग की। यह विषय सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और न्यायिकता पर केंद्रित है, जहाँ कथित गड़बड़ियों से उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकारी जवाबदेही और चुनावी विश्वास पर असर डालती है, और यदि सही ढंग से निपटा नहीं गया तो सार्वजनिक संस्थानों में अविश्वास बढ़ सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि भर्ती प्रक्
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
भर्ती परीक्षा गड़बड़ी के आरोपों से समाज में विश्वास की धारा टूटती है। जब किसी भी परीक्षा में धोखाधड़ी पाई जाए, तो न केवल दोषियों को सख्त दंड देना चाहिए, बल्कि पूरी प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करना ज़रूरी है। इससे युवाओं को सही मार्ग पर चलने का प्रोत्साहन मिलेगा और शिक्षा के प्रति उनका भरोसा पुनः स्थापित होगा।