भास्कर अपडेट्स:तमिलनाडु में हिंदी कवर वाली दवाओं के वितरण पर रोक, तीन भाषा नीति लागू करने का आरोप
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तमिलनाडु के कोयंबटूर और करूर के सरकारी अस्पतालों में दवाएं रखने वाले तीन भाषाओं में छपे कवर का वितरण रोक दिया गया है। इन पर दवा की खुराक संबंधी जानकारी तमिल, अंग्रेजी और हिंदी में छपी थी। द्रमुक नेता टीआरबी राजा ने आरोप लगाया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में भी तीन भाषा नीति लागू की जा रही है।
वहीं, अधिकारियों ने कहा कि इनका इस्तेमाल 18 महीने से हो रहा है। पिछली सरकार के कार्यकाल में भी इनका उपयोग हुआ था। राज्य में हिंदी विरोध का इतिहास आजादी से पहले का है। 1937 में स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ पेरियार के नेतृत्व में आंदोलन हुआ था। 1965 में विरोध-प्रदर्शन में 60 से अधिक की मौत हुई।
इसके बाद तमिलनाडु ने तमिल और अंग्रेजी की दो-भाषा नीति अपनाई और केंद्र की तीन-भाषा नीति का लगातार विरोध करता रहा। आज की अन्य बड़ी खबरें… मुंबई के कांदिवली में 16 मंजिला बिल्डिंग में आग लगी, हादसे में कोई नुकसान नहीं मुंबई के कांदिवली इलाके में बुधवार रात 16 मंजिला बिल्डिंग में आग लग गई।
हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। दमकल अधिकारियों के मुताबिक, आग रात 9:14 बजे शीतल फीनिक्स क्लास के सामने स्थित ओएसके हेरिटेज बिल्डिंग में लगी। आग 13वीं और 14वीं मंजिल की खिड़कियों, कपड़ों और बिजली के सामान तक सीमित रही। सूचना मिलते ही दमकल की 4 गाड़ियां और अन्य अग्निशमन वाहन मौके पर पहुंचे।
दो घंटे से ज्यादा की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। केंद्र सरकार ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का पुनर्गठन किया, 13 नए सदस्य नामित केंद्र सरकार ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) का पुनर्गठन किया है। इसमें 13 नए सदस्यों को नामित किया गया है।
इनमें ज्यादातर संपादक और कार्यरत पत्रकार हैं। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की अध्यक्ष सेवानिवृत्त जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई हैं। काउंसिल में पहले 14 सदस्य थे। इनमें 5 सांसद, 6 समाचार पत्र मालिकों के प्रतिनिधि और BCI, UGC व साहित्य अकादमी के एक-एक विशेषज्ञ शामिल थे। अब सरकार ने 6 संपादकों और 7 अन्य कार्यरत पत्रकारों को सदस्य नामित किया है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक स्वायत्त संस्था है। इसकी स्थापना प्रेस काउंसिल एक्ट, 1978 के तहत हुई थी। इसका उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता बनाए रखना और समाचार पत्रों व न्यूज
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में दवाओं के कवर पर तीन भाषाओं—तमिल, अंग्रेजी, और हिंदी—का इस्तेमाल रोकने से संबंधित है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्वास्थ्य सूचना की पहुँच और भाषा नीति के बीच के विवाद को उजागर करता है, जिसे टीआरबी राजा ने राज्य में तीन भाषा नीति लागू करने के आरोप के रूप में उठाया है। यदि यह रोक लागू रहती है, तो मरीजों को दवा की खुराक और उपयोग के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो हिंदी या अंग्रेजी में सहज नहीं है