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भास्कर सर्वे-पंजाब में 2027 में किसी पार्टी को बहुमत नहीं:AAP-कांग्रेस में कांटे की टक्कर, BJP डार्क हॉर्स, अमृतपाल की पार्टी खोल सकती है खाता

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भास्कर सर्वे-पंजाब में 2027 में किसी पार्टी को बहुमत नहीं:AAP-कांग्रेस में कांटे की टक्कर, BJP डार्क हॉर्स, अमृतपाल की पार्टी खोल सकती है खाता

पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल सकती है। वहीं, BJP डार्क हॉर्स के रूप में उभर सकती है। दैनिक भास्कर एप की ओर से कराए गए सर्वे में ये ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यह सर्वे 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर के बीच पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर किया गया।

इसमें 102 सीटों का रिजल्ट घोषित किया गया, जबकि 15 सीटों पर नतीजे निकालने लायक वोटिंग नहीं हुई। इस सर्वे के मुताबिक, पंजाब में इस बार किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। 34 सीटों पर AAP और इतनी ही सीटों पर कांग्रेस लोगों की पहली पसंद बनी। 2022 में AAP ने 92 और कांग्रेस ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

सर्वे रिजल्ट के मुताबिक, इस बार BJP डार्क हॉर्स बनकर उभर सकती है। लोगों ने 30 सीटों पर उसे अपनी पहली पसंद के तौर पर रखा है। BJP ने इससे पहले पंजाब में कभी भी 19 से ज्यादा सीटें नहीं जीतीं। BJP ने 2007 में अकाली दल से गठबंधन के दौरान 23 सीटों पर चुनाव लड़कर यह जीत हासिल की थी। शिरोमणि अकाली दल के लिए इस सर्वे में अच्छे संकेत नहीं मिले।

वह सिर्फ 2 सीटों पर आगे रही। सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल-वारिस पंजाब दे का खाता इस चुनाव में खुल सकता है। हालांकि, लोगों ने सिर्फ एक सीट पर उसे सबसे आगे रखा है। इस सर्वे में AAP को करीब 60 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। वहीं, कांग्रेस और भाजपा को फायदा हो सकता है। हंग असेंबली आई तो ऐसा 58 साल बाद होगा

2027 के चुनाव नतीजे इसी सर्वे के हिसाब से आए तो पंजाब में तकरीबन 58 साल बाद हंग असेंबली (त्रिशंकु विधानसभा) बनेगी। इससे पहले पंजाब में आखिरी बार वर्ष 1969 के विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। 1966 में हरियाणा अलग होने और पंजाब का कुछ हिस्सा हिमाचल में शामिल किए जाने के बाद यहां विधानसभा सीटों की संख्या 154 से घटाकर 104 कर दी गई थी।

तब सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 53 सीटों का था। उस समय के चुनाव में 43 सीटें जीतकर शिरोमणि अकाली दल सबसे बड़ी पार्टी बनी। कांग्रेस को 38, भारतीय जनसंघ को 8 और अन्य दलों व निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। बाद में अकाली दल ने जनसंघ और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई थी।

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📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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