भीलवाड़ा में 9 साल बाद RSS का भव्य त्रिवेणी संगम, पुष्पवर्षा से स्वागत
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भीलवाड़ा में RSS के शताब्दी वर्ष और विजयादशमी के अवसर पर 9 साल बाद भव्य त्रिवेणी संगम निकाला गया। तीन स्थानों से निकले स्वयंसेवकों के संचलन का अंबेडकर चौराहे और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में संगम हुआ, जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया।
भीलवाड़ा, 20 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना दिवस, विजयादशमी और संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भीलवाड़ा में 9 साल बाद भव्य त्रिवेणी संगम का आयोजन किया गया। आकर्षक बैंड की धुन पर पूर्ण गणवेश में स्वयंसेवकों ने अनुशासित कदमताल करते हुए शहर में संचलन निकाला। इस दौरान स्वयंसेवकों ने एकता, संगठनात्मक समन्वय और राष्ट्रभाव का संदेश दिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय संत आचार्य पुलक सागर, महंत मोहन शरण, महामंडलेश्वर बाबू गिरी महाराज और विधायक अशोक कोठारी सहित कई संत-महात्मा और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। शहर के विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया।
महानगर के सात नगरों के स्वयंसेवकों ने तीन अलग-अलग स्थानों से पथ संचलन शुरू किया। पहला संचलन कृषि उपज मंडी, दूसरा हरि सेवा धाम और तीसरा राजेंद्र मार्ग विद्यालय से रवाना हुआ।
निर्धारित मार्गों से आगे बढ़ते हुए तीनों संचलन सुबह 10 बजकर 21 मिनट पर अंबेडकर चौराहे और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पहुंचे। यहां तीनों संचलनों का त्रिवेणी संगम हुआ। इसके बाद सुबह 10 बजकर 26 मिनट पर गोल प्याऊ चौराहे से तीनों संचलन अलग-अलग मार्गों पर आगे बढ़े।
पथ संचलन सरकारी दरवाजा, एमजी हॉस्पिटल, भीमगंज थाना, बड़ा मंदिर, बद्री विशाल मंदिर, शहीद चौक, सांगानेरी गेट और माणिक्य नगर चौराहे सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा।
इस दौरान पूर्ण गणवेश में स्वयंसेवकों की लंबी कतारें और बैंड की धुन पर अनुशासित कदमताल आकर्षण का केंद्र रही। शहर में जगह-जगह नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया।
आयोजन के दौरान शहर में वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस जाप्ता तैनात रहा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संचलनों का समापन हरि सेवा धाम और राजेंद्र मार्ग विद्यालय में हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस त्रिवेणी संगम के माध्यम से सेवा, समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रभाव का संदेश दिया गया। नौ साल बाद आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में तीन अलग-अलग संचलनों का एक स्थान पर संगम आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।