भोपाल

भोपाल- आईआईएसईआर में प्रवासन, शहरी स्थान और जलवायु परिवर्तन विषय पर ऑनलाइन समर स्कूल का आयोजन

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भोपाल- आईआईएसईआर में प्रवासन, शहरी स्थान और जलवायु परिवर्तन विषय पर ऑनलाइन समर स्कूल का आयोजन

समर स्कूल का उद्देश्य प्रवासन और समाज, शहरी स्थान, पर्यावरण तथा सार्वजनिक नीति के बीच बदलते और जटिल संबंधों की आलोचनात्मक एवं अंतर्विषयी समझ विकसित करना था। कार्यक्रम के दौरान प्रवासन को केवल एक जनसांख्यिकीय प्रक्रिया के रूप में देखने के बजाय प्रवासियों के जीवंत अनुभवों, असमानताओं, असुरक्षाओं तथा उन सामाजिक प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया, जो प्रवासी जीवन को प्रभावित करती हैं।

कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभवों और सार्वजनिक नीति के साथ जोड़ना था। विभिन्न विषयों और अनुशासनों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करते हुए समर स्कूल ने शोध एवं जमीनी अनुभवों से उभरने वाले दृष्टिकोणों को साझा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। इस पहल के माध्यम से सोशल पॉलिसी लैब ने जलवायु परिवर्तन और विस्थापन से प्रभावित कमजोर एवं हाशिए पर स्थित समुदायों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों को रेखांकित किया तथा ऐसी सामाजिक नीति की आवश्यकता पर बल दिया, जो प्रवासियों के शहर और शहरी स्थानों पर अधिकार को केंद्र में रखे।

समर स्कूल का आयोजन एवं समन्वय डॉ. अजीत कुमार पंकज और डॉ. अनिकेत नंदन, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग, आईआईएसईआर भोपाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन 1 सितंबर 2026 को आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक प्रो. रघुवीर सिंह तोमर ने किया। इस अवसर पर संस्थान के उपनिदेशक प्रो. संजीत कोनार तथा मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. अंतरा चटर्जी भी उपस्थित रहीं। उद्घाटन सत्र में कनाडा स्थित इंटरनेशनल डेवलपमेंट रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ कार्यक्रम विशेषज्ञ डॉ. अरजन डी हान ने मुख्य वक्तव्य दिया तथा सत्र का संचालन किया।

कार्यक्रम में प्रवासन अध्ययन का परिचय, प्रवासन एवं शहरी अवसंरचना तथा शहरी पारिस्थितिकी, प्रवासन एवं अनौपचारिकता तथा जलवायु जोखिम, प्रवासन अध्ययन की शोध-पद्धतियाँ, नीतियों एवं प्रवासी जीवन के बीच अंतर्विरोध, प्रवासन-शहरी स्थान-जलवायु परिवर्तन का अंतर्संबंध, तथा प्रवासन अध्ययन और शहरी स्थानों में भविष्य के शोध की संभावनाओं जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही प्रवासन को प्रभावित करने वाले विभिन्न सामाजिक कारकों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

7 सितंबर को समर स्कूल के समापन सत्र में प्रवासन और शहरी जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों पर चर्चा हुई। इनमें प्रमुख प्रश्न थे—किसे प्रवास करने का अधिकार है? प्रवासी उन शहरों में किस प्रकार भागीदारी करते हैं जहाँ वे रहते हैं? तथा सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और नीतिगत परिस्थितियाँ प्रवासियों के अनुभवों को किस प्रकार आकार देती हैं? इन प्रश्नों के माध्यम से प्रवासन, नागरिकता, शहरी अधिकार और सामाजिक न्याय के व्यापक आयामों पर विचार किया गया।

इस ऑनलाइन समर स्कूल में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में विभिन्न विषयों एवं संस्थानों से जुड़े शिक्षक, प्रारंभिक चरण के शोधकर्ता एवं स्वतंत्र शोधकर्ता, शोधार्थी तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी शामिल थे। देश के विभिन्न शोध संस्थानों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राज्य विश्वविद्यालयों से प्रतिभागियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक अंतर्विषयी स्वरूप प्रदान किया।

आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक ने इस पहल के लिए सोशल पॉलिसी लैब, कार्यक्रम के संयोजकों डॉ. अनिकेत नंदन एवं डॉ. अजीत कुमार पंकज तथा लैब के सभी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने सामाजिक विज्ञान को अधिक कार्रवाई-उन्मुख और समाजोपयोगी बनाने तथा प्राकृतिक विज्ञान एवं इंजीनियरिंग सहित विभिन्न विषयों के बीच सार्थक अंतर्विषयी संवाद स्थापित करने की दिशा में इस पहल के महत्व को रेखांकित किया।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

भोजपुर में आईआईएसईआर द्वारा आयोजित समर स्कूल, प्रवासन, शहरी स्थान और जलवायु परिवर्तन के जटिल संबंधों पर केंद्रित है। यह कार्यक्रम प्रवासियों के अनुभव, असमानताओं और असुरक्षाओं को उजागर करते हुए, उन्हें केवल जनसांख्यिकीय आँकड़ों तक सीमित न रखते हुए, नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं को नई दृष्टि प्रदान करता है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण के बीच प्रवासन के पैटर्न बदल रहे हैं, जिससे सामाजिक नीति और शहरी नियोजन में बदलाव की आवश्यकता है। आम जनता को इससे बेहतर शहर

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।