भोपाल

भोपाल में अरेरा कॉलोनी के कथित अवैध मॉल पर कार्रवाई ना करने का मुद्दा पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, रहवासियों ने नगर निगम पर छोटे कारोबारियों के खिलाफ सीलिंग करने और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कथित राहत देने का लगाया आरोप

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

भोपाल। अरेरा कॉलोनी में कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और नगर निगम की कार्रवाई को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं।

रहवासियों का आरोप है कि जिन मॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संबंध में उनके द्वारा शिकायतें की गई थीं, उन पर अब तक सीलिंग की कार्रवाई नहीं की गई, जबकि दूसरी ओर छोटे व्यापारियों के खिलाफ नगर निगम कार्रवाई कर रहा है।

याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के अनुसार, अरेरा कॉलोनी में कथित अवैध मॉल को लेकर रहवासियों द्वारा नगर निगम में शिकायतें की गई थीं। उनका आरोप है कि इन शिकायतों के बावजूद संबंधित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

वहीं नगर निगम द्वारा शहर के अन्य हिस्सों में छोटे दुकानदारों और व्यापारियों के खिलाफ सीलिंग कार्रवाई किए जाने से रहवासियों में नाराजगी है। त्रिपाठी ने बताया कि रहवासियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर नगर निगम की कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया है।

उन्होंने न्यायालय से मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है। रहवासियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां नियमों के विपरीत संचालित हो रही हैं तो कार्रवाई में समानता और पारदर्शिता होनी चाहिए।

उनका आरोप है कि छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामलों में अलग-अलग रवैया अपनाया जा रहा है। हालांकि, नगर निगम की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।

अरेरा कॉलोनी में संबंधित मॉलों की वैधानिक स्थिति, पूर्व शिकायतों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन से जुड़े दावों की पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों और न्यायालयीन रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

भोपाल के अरेरा कॉलोनी में अवैध मॉल पर कार्रवाई न करने के आरोप से नगर निगम पर सवाल उठे हैं, जिससे यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। यह विषय नगर निगम की नियामक क्षमता और छोटे व्यवसायियों के प्रति न्यायिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि स्थानीय प्रशासन बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को प्राथमिकता देते हुए छोटे व्यापारियों को अनदेखा कर सकता है। यदि इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ तो आम जनता पर असर पड़ेगा: छोटे व्यवसायियों को आर्थिक कठिनाइयाँ, आवासीय क्षेत्रों

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।