भोपाल में भाजपा पार्षद के परिवार पर RTI कार्यकर्ता से मारपीट का आरोप, धमकी भरा ऑडियो वायरल, देखें वीडियो
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भोपाल। राजधानी के मिसरोद थाना क्षेत्र में भाजपा की वार्ड-52 पार्षद शीला रामबाबू पाटीदार के परिवार और RTI कार्यकर्ता अजय पाटीदार के बीच विवाद ने तूल पकड़ लिया है। क्षेत्र की समस्याओं और नाली की गंदगी का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के बाद शुरू हुआ विवाद अब कथित धमकी और मारपीट तक पहुंच गया। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें अजय पाटीदार को रात के समय घर बुलाने और धमकाने की बात सामने आ रही है।
अजय पाटीदार का आरोप है कि क्षेत्र की समस्याओं को सोशल मीडिया पर उठाने के कारण उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही थीं। आरोप के मुताबिक, रात करीब 12 बजे तक उन्हें फोन कर घर से बाहर आने की चुनौती दी गई। इसके बाद एक नवंबर की सुबह करीब नौ बजे जब वह मंदिर जा रहे थे, तब रामलीला मैदान के पास उन्हें घेरकर मारपीट की गई। अजय के पिता मुरलीधर पाटीदार भी बीच-बचाव करने पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई। पिता-पुत्र को चोटें आईं और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
नाली की सफाई का वीडियो बना विवाद की वजह
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, क्षेत्र में नाली की सफाई का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद विवाद बढ़ा। अजय पाटीदार का कहना है कि वह वार्ड की समस्याओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे लगातार उठा रहे थे। उनका आरोप है कि इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। घटना के बाद सामने आए वीडियो में भी मारपीट के कुछ दृश्य होने की बात कही जा रही है।
दोनों पक्षों ने दर्ज कराई शिकायत
मिसरोद पुलिस के अनुसार, इस मामले में दोनों पक्षों की शिकायतों पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई है। रिपोर्टों में रामबाबू पाटीदार, अमन पाटीदार, नरेश रामानंद, निखिल और अंशुल सहित अन्य लोगों के नाम एक पक्ष की शिकायत में सामने आए हैं। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से अजय पाटीदार, मुरलीधर और अरुण पाटीदार के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
दूसरी ओर, रामबाबू पाटीदार ने अजय पाटीदार पर विकास कार्यों के नाम पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। इस तरह दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं और पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर उठे सवाल
इस घटना ने जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के बीच संवाद तथा जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वार्ड की समस्याओं को उठाना और जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। वहीं, किसी भी पक्ष को शिकायत या आरोप होने पर कानून के तहत पुलिस और प्रशासन का सहारा लेना चाहिए। अब इस मामले में वायरल ऑडियो, मारपीट के आरोपों और दोनों पक्षों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।