Bhopal Digital Arrest: ED-CBI और सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर 97 दिन तक डिजिटल अरेस्ट, बुजुर्ग दंपती से 22 लाख की ठगी

Bhopal Digital Arrest: भोपाल में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां ठगों ने ईडी, दिल्ली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट के नाम का डर दिखाकर एक बुजुर्ग दंपती को करीब 97 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा।
आरोपियों ने दंपती को जेट एयरवेज के पूर्व प्रमुख नरेश गोयल से जुड़े मनी ट्रांजेक्शन मामले में फंसने और गिरफ्तार होने का डर दिखाया। संपत्ति जब्त करने की धमकी देकर उनसे गहने गिरवी रखवाए गए और 22 लाख रुपए ठगों के खाते में ट्रांसफर करा लिए गए।
दरियागंज पुलिस अधिकारी बनकर किया फोन मामला भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र का है। 65 साल की सुवर्णा लक्ष्मी अपने पति नरसिम्हा राव के साथ गणपति इन्क्लेव में रहती हैं। सुवर्णा निजी स्कूल चला चुकी हैं, जबकि उनके पति निजी कंपनी के वित्त विभाग से रिटायर हुए हैं। 19 मई को सुवर्णा के मोबाइल पर अनजान नंबर से फोन आया।
कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी खन्ना बताया। उसने कहा कि दिल्ली के केनरा बैंक में उनके नाम से एक खाता है और उससे नरेश गोयल से जुड़े मामले में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है।
वीडियो कॉल पर रखा, सुप्रीम कोर्ट की पेशी का डर दिखाया ठगों ने दंपती को गिरफ्तारी का डर दिखाया और कहा कि मामले में उनकी सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी होगी। इसके बाद उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए कहा गया।
दंपती को यह भी धमकी दी गई कि मामला गोपनीय है और इसकी जानकारी किसी रिश्तेदार या परिचित को दी तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यहां तक कहा गया कि मामले से जुड़े लोग उन्हें जान से भी मार सकते हैं। महिला ने खुद को CID अधिकारी बताया 2 दिन बाद एक महिला ने दंपती को फोन किया।
उसने अपना नाम निशा पटेल बताया और खुद को CID की मुख्य जांच अधिकारी बताया। उसने दोनों के बैंक खातों और दूसरी वित्तीय जानकारी के बारे में पूछताछ की। इसके बाद ठगों ने एक व्यक्ति से बात कराई और उसे सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बताया।
इस तरह अलग-अलग सरकारी एजेंसियों और सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर दंपती के मन में डर बैठा दिया गया। फर्जी जब्ती आदेश भेजकर मांगे 22 लाख 9 जून को आरोपियों ने दंपती को संपत्ति जब्ती का एक कथित आदेश भेजा। इसमें एफडी और सोना-चांदी बेचने या गिरवी रखने के निर्देश दिए गए। इसके बाद उनसे 22 लाख रुपए तुरंत जमा करने को कहा गया।
डर की वजह से दंपती आंध्र प्रदेश से भोपाल लौट आए। 12 जून को उन्होंने कैप्री गोल्ड में अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपए का लोन लिया और ठगों के बताए खाते में रकम जमा कर दी। लेकिन रकम देने के बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ।
ठग उन्हें लगातार वीडियो कॉल से जुड़े रहने और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा करते रहे। 3 महीने बाद बेटी की सहेली ने खोला राज दंपती को भेजे गए कथित दस्तावेज उनकी बेटी ने सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही अपनी सहेली को दिखाए। दस्तावेज देखते ही उसे शक हुआ।
जांच में पता चला कि पूरा मामला फर्जी था और दंपती साइबर ठगों के जाल में फंस चुके थे। इसके बाद 23 अगस्त की रात दंपती ने कोलार थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। पुलिस इसे देश के सबसे लंबे डिजिटल अरेस्ट मामलों में से एक मान रही है।
ये खबर भी पढ़ें: भोपाल में शिक्षक उम्मीदवारों के बीच पहुंचे दिग्विजय सिंह, बोले- मांगें नहीं मानीं तो 24 घंटे करूंगा भूख हड़ताल डर के बीच उज्जैन में कराया पूजन ठगी के शिकार नरसिम्हा राव ने पुलिस को बताया कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उन्हें लगने लगा था कि परिवार का बुरा समय चल रहा है।
उन्होंने ठगों से कुछ घंटों की मोहलत मांगी और इसके बाद पत्नी के साथ उज्जैन पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रह दोष शांत कराने के लिए पूजा-अनुष्ठान भी कराया। करीब 3 महीने तक सरकारी अधिकारी और सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर उन्हें बंधक बनाए रखने वाले ठगों का सच आखिरकार बेटी की एक समझदारी भरी कोशिश से सामने आया।
📡 स्रोत: NewsData.io