भोपाल में द्वितीय कंबर महोत्सव का भव्य आयोजन
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तमिल साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प, साहित्यकारों को कंबर पुरस्कार से किया सम्मानित
भोपाल। 12वीं शताब्दी के महान तमिल कवि कंबर की साहित्यिक कृतियों और उनके विचारों की प्रासंगिकता आज भी कायम है। इसी साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और तमिल भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के उद्देश्य से भोपाल कंबर कझगम एवं वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 5 सितंबर को द्वितीय कंबर महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया।
वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित समारोह में भोपाल कंबर कझगम के महासचिव पा. कुमार ने अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया। कार्यक्रम में वीआईटी विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. शंकर विश्वनाथन, भोपाल कंबर कझगम के अध्यक्ष डॉ. का. पा. सौंदरराजन, कुलपति डॉ. सतीश कुमार मोथ, सह-कुलपति डॉ. श्रीधरन, रजिस्ट्रार ज्ञान प्रकाश मिश्रा सहित डॉ. एस. प्रभाकर, डॉ. पूंगुन्द्रन एवं अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।
समारोह में डॉ. के.बी.एस. सौंधरा राजन तथा मुख्य अतिथि डॉ. आर. मुकुंदन, महासचिव अखिल भारतीय तमिल संगम महासंघ ने भी सहभागिता की। अतिथियों ने कंबर की साहित्यिक परंपरा और तमिल भाषा-संस्कृति के महत्व पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के दौरान महान कवि कंबर के चित्र का अनावरण किया गया। इसके पश्चात विभिन्न सांस्कृतिक एवं कला कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां हुईं, जिनमें तमिल संस्कृति की समृद्ध परंपरा और साहित्यिक विरासत की झलक देखने को मिली।
तमिल साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों एवं साहित्यकारों को कंबर पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं विभिन्न तमिल संगठनों के प्रतिनिधियों को भी स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
समारोह में बड़ी संख्या में तमिल संगठनों के प्रतिनिधि, साहित्यकार, तमिल भाषा के विद्वान एवं साहित्यप्रेमी शामिल हुए। आयोजन के माध्यम से तमिल साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश दिया गया। सभी की सहभागिता से द्वितीय कंबर महोत्सव सफल एवं यादगार बना।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
भोजपुरी में द्वितीय कंबर महोत्सव का आयोजन भोपाल में तमिल साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह महोत्सव 12वीं शताब्दी के महान कवि कंबर की रचनाओं को पुनर्जीवित करने और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से कंबर पुरस्कार से साहित्यकारों को सम्मानित किया गया, जिससे उनकी कृतियों की महत्ता और भी उजागर हुई। यह पहल भारतीय सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देती है और तमिल भाषा के प्रति जागरूकता फैलाती है। जनता को यह अनुभव मिलेगा कि सांस्कृति