भोपाल - राज्य स्तरीय पोषण माह शुभारंभ पर एम्स भोपाल और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच समझौता
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राज्य स्तरीय पोषण माह शुभारंभ पर एम्स भोपाल और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच समझौता
मुख्य बिंदु: • इंदौर के लता मंगेशकर सभागृह में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के राज्य स्तरीय शुभारंभ के अवसर पर एम्स भोपाल और महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन के बीच समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।
• यह समझौता प्रदेश में समुदाय आधारित तीव्र कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम को वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
• एम्स भोपाल के सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग के अंतर्गत संचालित राज्य उत्कृष्टता केंद्र इस साझेदारी के तहत तकनीकी सहयोग का प्रमुख केंद्र बनेगा।
• समझौते पर हस्ताक्षर श्री संदीप जी.आर. (आयुक्त, महिला एवं बाल विकास विभाग) ने किए, जबकि साझेदारी को आगे बढ़ाने में डॉ. अरुण एम. कोकणे (विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर, सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग, एम्स भोपाल) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
• कार्यक्रम में श्रीमती निर्मला भूरिया (मंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन) और श्रीमती कविता पाटीदार (सांसद, राज्यसभा) ने जनभागीदारी पर जोर दिया, जबकि वाराणसी से राष्ट्रीय वेबकास्ट में श्री योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश), श्रीमती अन्नपूर्णा देवी (केंद्रीय मंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) और श्रीमती सावित्री ठाकुर (केंद्रीय राज्य मंत्री) ने भी संबोधित किया।
"सही पोषण – देश रोशन" के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का राज्य स्तरीय शुभारंभ आज इंदौर के लता मंगेशकर सभागृह में हुआ। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन और एम्स भोपाल के बीच समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मध्यप्रदेश में समुदाय आधारित तीव्र कुपोषण प्रबंधन (बच्चों में गंभीर कुपोषण की पहचान और इलाज की व्यवस्था) कार्यक्रम को वैज्ञानिक, साक्ष्य-आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एम्स भोपाल प्रदेश में स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। इसी दृष्टिकोण के अंतर्गत एम्स भोपाल के सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग ने मध्यप्रदेश में पोषण कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहयोग की पहल की है।
इस साझेदारी को आगे बढ़ाने और विभाग के साथ समझौता-ज्ञापन को सुगम बनाने में डॉ. अरुण एम. कोकणे (विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर, सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग, एम्स भोपाल) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व में विभाग पोषण एवं कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रमों में तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण, डेटा आधारित निगरानी और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से श्री संदीप जी.आर. (आयुक्त, महिला एवं बाल विकास विभाग) ने एम्स भोपाल के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी समुदाय स्तर पर तीव्र कुपोषण से प्रभावित बच्चों की पहचान, मूल्यांकन, प्रबंधन, निगरानी, रेफरल और फॉलो-अप की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहयोग करेगी। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कुपोषित बच्चों की पहचान तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें समय पर उचित देखभाल उपलब्ध कराना, परिवारों को पोषण संबंधी व्यवहार के लिए सक्षम बनाना और उपचार व फॉलो-अप की निरंतरता सुनिश्चित करना भी है।
एम्स भोपाल के सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग के अंतर्गत संचालित राज्य उत्कृष्टता केंद्र इस समझौते के तहत तकनीकी सहयोग का प्रमुख केंद्र बनकर कार्य करेगा। इस केंद्र का उद्देश्य है कि स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों की योजना और निर्णय विश्वसनीय डेटा, वैज्ञानिक विश्लेषण, अनुसंधान और मैदानी अनुभव के आधार पर लिए जाएं। यह केंद्र कार्यक्रम से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर कमियों और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करेगा तथा विभाग को आवश्यक तकनीकी सुझाव देगा।
राज्य उत्कृष्टता केंद्र कार्यक्रम निगरानी, डेटा विश्लेषण, तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग को सहयोग देगा। विशेष रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान से लेकर उपचार, फॉलो-अप और कार्यक्रम के परिणामों की निगरानी तक की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर रहेगा। यह साझेदारी नीति, अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार, इन चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी, ताकि मैदानी स्तर से मिलने वाली जानकारी को वैज्ञानिक विश्लेषण के जरिए नीति और कार्यक्रम सुधार से जोड़ा जा सके।
एम्स भोपाल का मानना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफलता केवल सेवाओं की उपलब्धता से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक परिणामों से मापी जानी चाहिए। इसी सोच के साथ राज्य उत्कृष्टता केंद्र उपलब्ध आंकड़ों, मैदानी अनुभवों और अनुसंधान के आधार पर निरंतर सुधार की प्रक्रिया को बढ़ावा देगा। इस साझेदारी से विभागीय अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की क्षमता को मजबूत किया जाएगा और साथ ही समुदाय की भागीदारी व जवाबदेही को भी बढ़ावा मिलेगा, ताकि पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ लक्षित आबादी तक समय पर पहुंच सके।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती निर्मला भूरिया (मंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन) ने पोषण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पोषण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, समुदाय और विभिन्न विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य संसाधनों के उपयोग और गर्भवती व धात्री माताओं के पोषण पर विशेष जोर दिया। श्रीमती कविता पाटीदार (सांसद, राज्यसभा) ने भी पोषण को समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बताते हुए जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में भारत सरकार द्वारा वाराणसी से प्रसारित राष्ट्रीय वेबकास्ट भी दिखाया गया, जिसे श्री योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश), श्रीमती अन्नपूर्णा देवी (केंद्रीय मंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) और श्रीमती सावित्री ठाकुर (केंद्रीय राज्य मंत्री) ने संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान "जीवन के पहले 1000 दिन", "सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही" तथा "हमारी आंगनवाड़ी – हमारी जिम्मेदारी" विषयों पर प्रदर्शनी और सूचना-पट भी लगाए गए।
एम्स भोपाल और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच यह समझौता प्रदेश में पोषण कार्यक्रमों के लिए चिकित्सा संस्थान की विशेषज्ञता और सरकारी तंत्र की मैदानी पहुंच को एक साथ जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। एम्स भोपाल का उद्देश्य केवल तकनीकी सलाह देना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक ज्ञान को जमीनी कार्यक्रमों से जोड़कर ऐसे मॉडल विकसित करना है जिन्हें प्रभावी, टिकाऊ और व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके। इस पहल के जरिए एम्स भोपाल की प्रतिबद्धता है कि हर बच्चे को समय पर उचित पोषण और देखभाल मिले तथा वैज्ञानिक ज्ञान व तकनीकी नवाचार का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।