भोपाल की सड़कों पर बदहाली का जाम, जिम्मेदार बेखबर!

प्रभात पेट्रोल पंप चौराहे से अशोका गार्डन तक वाहनों की कतारें, स्कूल बसें और एंबुलेंस भी फंसीं
भोपाल। राजधानी भोपाल में ट्रैफिक व्यवस्था की बदहाली अब रोजमर्रा की परेशानी बनती जा रही है। सोमवार दोपहर प्रभात पेट्रोल पंप चौराहे पर हालात ऐसे बिगड़े कि अप्सरा से प्रभात चौराहा, अशोका गार्डन और सुभाष नगर की तरफ करीब एक किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई।
देखते ही देखते सड़क पर ऐसा जाम लगा कि राहगीरों के सब्र का इम्तिहान होने लगा।

जाम में आम वाहन चालकों के साथ स्कूल बसें और एंबुलेंस तक फंस गईं। स्कूल बसों में बैठे बच्चे काफी देर तक जाम खुलने का इंतजार करते रहे, वहीं जरूरी काम से निकलने वाले लोगों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी।

चालान काटने में मुस्तैदी, ट्रैफिक संभालने में क्यों सुस्ती?
शहरवासियों का कहना है कि यातायात पुलिस की सक्रियता अक्सर हेलमेट और दस्तावेजों की चेकिंग में दिखाई देती है। सवाल यह है कि अगर इसी मुस्तैदी से चौराहों पर ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों, गलत दिशा में चलने वाले वाहनों और अव्यवस्थित पार्किंग पर नजर रखी जाए तो शायद जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

भोपाल के कई प्रमुख चौराहों पर सिग्नल लगे हैं, लेकिन कई जगह उनके संचालन को लेकर सवाल उठते हैं। चौराहों पर कैमरे भी दिखाई देते हैं, मगर आम नागरिकों के बीच यह सवाल बना रहता है कि ये कैमरे वास्तव में कितने सक्रिय हैं और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कितनी होती है?
व्यवस्था बदले तो जाम भी बदले!
शहरवासियों का सुझाव है कि प्रमुख चौराहों पर आने-जाने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग लेन निर्धारित की जाएं, बीच में मजबूत बैरिकेडिंग की जाए और कैमरों के जरिए नियम तोड़ने वालों की पहचान कर चालान सीधे घर भेजे जाएं।
अगर व्यवस्था सिर्फ चालान वसूली तक सीमित रहने के बजाय ट्रैफिक मैनेजमेंट और नियमों के पालन पर केंद्रित हो, तो राजधानी की सड़कों पर रोज लगने वाले जाम से काफी हद तक निजात मिल सकती है। सवाल सीधा है... जब राजधानी में ट्रैफिक व्यवस्था के लिए सिग्नल, कैमरे और पुलिस बल मौजूद हैं, तो फिर हर चौराहे पर जाम क्यों?
क्या व्यवस्था तभी जागेगी जब एंबुलेंस जाम में फंसे और स्कूल बसों में बैठे बच्चों को घंटों इंतजार करना पड़े? भोपाल के नागरिक अब सिर्फ चालान नहीं, सुव्यवस्थित यातायात चाहते हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि प्रमुख चौराहों का निरीक्षण कर स्थायी ट्रैफिक प्लान तैयार करें, ताकि राजधानी की सड़कें रोजाना जाम का पर्याय न बनें।