भोपाल

भोपाल- सावन के अंतिम सोमवार शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

लेखक: AIR Bhopal अंतिम अपडेट: 24 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भोपाल- सावन के अंतिम सोमवार शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

रायसेन जिले के भोजपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध भोजेश्वर महादेव मंदिर में सावन के अंतिम सोमवार पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए। भगवान शिव का करीब 6 क्विंटल फूलों से आकर्षक श्रृंगार कर उन्हें महाकालेश्वर का स्वरूप दिया गया। श्रृंगार के बाद मंदिर के महंत पवन गिरि महाराज ने विधि-विधान से रुद्राभिषेक और पूजन कराया।

पूजन के बाद श्रद्धालुओं के लिए बाबा के दर्शन खोले गए। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे। महंत ने पूजा के दौरान विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। सोमेश्वर धाम समिति की ओर से नर्मदा घाट से नर्मदा जल भरकर करीब 110 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा निकाली गई।

कांवड़ यात्रा रायसेन पहुंची, जहां श्रद्धालु नर्मदा जल लेकर सोमेश्वर धाम पहुंचेंगे। यहां भगवान शिव का नर्मदा जल से अभिषेक किया जाएगा। कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। रास्तेभर भगवान शिव के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए कई स्थानों पर सेवा और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई। टीकमगढ़ के प्रसिद्ध शिवधाम कुंडेश्वर में अंतिम सोमवार पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे मंदिर के प्रधान पुजारियों ने भगवान भोलेनाथ का करीब एक घंटे तक रुद्राभिषेक किया।

सुबह 5 बजे गर्भगृह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। रिमझिम बारिश के बावजूद भक्त जलाभिषेक के लिए कतार में खड़े रहे। श्बम-बम भोलेश् और श्ॐ नमः शिवायश् के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। मंदिर ट्रस्ट की ओर से महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई। शाम को विशेष रुद्र श्रृंगार की तैयारी है।

मंदिर से जुड़े कलाकार रामू जड़िया के अनुसार, भगवान भोलेनाथ का रुद्र स्वरूप में श्रृंगार किया जाएगा। इसके लिए करीब 15 हजार रुद्राक्ष, चांदी की मुंड माला, कुंडल सहित अन्य आभूषण तैयार किए गए हैं। शाम 5 बजे गर्भगृह श्रद्धालुओं के लिए बंद कर श्रृंगार किया जाएगा और रात करीब 7.30 बजे महाआरती होगी।

मंदसौर के प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में सावन के अवसर पर विशेष दीप ज्योति शयन आरती का आयोजन किया जा रहा है। रविवार रात करीब 10.15 बजे हुई आरती के दौरान गर्भगृह की विद्युत रोशनी बंद कर केवल दीपों की रोशनी में भगवान पशुपतिनाथ की शयन आरती की गई। आरती के दौरान गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहा।

पुजारी ने गर्भगृह के भीतर जाकर आरती संपन्न कराई। इससे पहले बाबा को भस्म का तिलक लगाया गया। दीपों की रोशनी में भगवान पशुपतिनाथ का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।

मंदिर के मुख्य पुजारी राकेश भट्ट के अनुसार, काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकाल मंदिर की शयन आरती की परंपरा से प्रेरित होकर सावन के रविवार और सोमवार रात यह विशेष आयोजन किया जा रहा है। खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बनी हुई है।

शाम को भगवान की पारंपरिक सवारी निकाली जाएगी। सवारी के दौरान हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाएगी। सवारी में पुलिस बैंड, सात ढोल बैंड और धार्मिक झांकियां शामिल होंगी। आयोजन को लेकर मंदिर और आसपास के क्षेत्र में विशेष तैयारियां की गई हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से तीर्थनगरी में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल है।

आगर-मालवा में राजाधिराज बाबा बैजनाथ महादेव की राजसी सवारी निकाली जाएगी। इससे पहले ब्रह्म मुहूर्त में कलेक्टर डॉ. शेर सिंह मीना और एसपी दिलीप कुमार सोनी मंदिर पहुंचे। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान बैजनाथ का जलाभिषेक और पंचामृत से अभिषेक कर आरती की।

ग्वालियर के मोटे महादेव, जिन्हें हजारेश्वर के नाम से भी पूजा जाता है, के दर्शन के लिए अंतिम सोमवार पर आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार यहां भगवान शिव का अभिषेक करने से हजार गुना पुण्य प्राप्त होता है। इसी आस्था के चलते सुबह से ही मंदिर में भक्तों की आवाजाही बनी रही।

सावन के अंतिम सोमवार पर मध्यप्रदेश के छोटे-बड़े शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना हुई। कहीं रुद्राभिषेक तो कहीं पंचामृत अभिषेक और विशेष श्रृंगार किया गया। बारिश के बावजूद श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में पहुंचते रहे। प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए भी व्यवस्थाएं की गईं।

श्रावण के अंतिम सोमवार ने प्रदेश के धार्मिक स्थलों को आस्था, भक्ति और उत्सव के रंग में रंग दिया। कहीं कांवड़ियों ने नर्मदा जल से भगवान शिव का अभिषेक किया तो कहीं फूलों और रुद्राक्ष से सजे भोलेनाथ के अलौकिक स्वरूप ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया।

A
AIR Bhopal

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।