भोपाल- शिक्षक राष्ट्र निर्माण की पीढ़ी तैयार करते हैं: राज्यपाल पटेल मुख्यमंत्री यादव बोले- जहां गुरूर खत्म और गुण शुरू होते हैं, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि बच्चे की पहली पाठशाला उसका घर होता है, जहां माता-पिता उसे प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार देते हैं। इसके बाद शिक्षक बच्चों को ज्ञान और संस्कारों से परिपूर्ण कर राष्ट्र निर्माण की भावी पीढ़ी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को आत्मीयता, प्रेम और सहनशीलता के साथ पढ़ाएं।
उनकी बुद्धि, क्षमता और अपेक्षाओं को समझें तथा उनकी कठिनाइयों और जिज्ञासाओं को धैर्यपूर्वक सुनकर समाधान करें। शिक्षक स्वयं ज्ञान और नैतिक गुणों के आदर्श बनें और विद्यार्थियों में ईमानदारी, सहनशीलता और जुझारूपन जैसे गुण विकसित करें। राज्यपाल ने कहा कि बच्चे विकसित भारत के कर्णधार हैं और शिक्षक इन कर्णधारों के शिल्पकार हैं।
शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। बदलती वैश्विक जरूरतों और रोजगार के नए अवसरों के अनुरूप शिक्षा में लगातार अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन जरूरी है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता बताई। कला, विज्ञान, खेल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के बीच की दीवारें हटाकर विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुसार विषय चुनने का अवसर देने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने शिक्षकों से कहा कि वे केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं।
शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानें: राज्यपाल
राज्यपाल पटेल ने कहा कि शिक्षक दिवस पर उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान उन सभी शिक्षकों को नमन करने का अवसर है, जो ज्ञान और संस्कारों से देश का भविष्य गढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा को नए भारत की शक्ति बनाने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने शिक्षकों से भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने में योगदान देने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि बच्चों को मानसिक दबाव और परेशानियों से बचाने के लिए उन्हें प्रेमपूर्वक समझना जरूरी है। ऐसी पीढ़ी तैयार करनी होगी जो अपने माता-पिता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को समझे।
जहां गुरूर खत्म और गुण शुरू होते हैं, वहीं गुरु की दृष्टि: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर है। उन्होंने कहा, “जहां गुरूर खत्म होता है और गुण शुरू होता है, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है। गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज की सृष्टि होती है।” मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को दीपक के समान बताते हुए कहा कि वे स्वयं अंधेरे में रहकर अपने विद्यार्थियों का जीवन रोशन करते हैं।
माता-पिता के बाद शिक्षक ही ऐसे व्यक्ति होते हैं, जो चाहते हैं कि विद्यार्थी वही बने जो वह वास्तव में बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि देश का नक्शा कागज पर बनता है, लेकिन देश की किस्मत कक्षाओं में शिक्षक बनाते हैं। शिक्षक को सबसे अधिक गर्व तब होता है, जब उसका शिष्य उससे आगे बढ़ता है।
जरूरतमंद वरिष्ठ शिक्षकों के लिए ऑफलाइन टीईटी कराने का प्रयास
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिक्षक सम्मान समारोह में महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के जिन वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी परीक्षा देना आवश्यक है और जिन्हें इसकी जरूरत है, उनके लिए ऑफलाइन टीईटी परीक्षा कराने के प्रयास और प्रबंध किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत होने वाली टीईटी परीक्षा ऑफलाइन मोड में होगी।
सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के शासकीय स्कूलों को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में 50 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी शासकीय स्कूलों के होते हैं।
यह शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिश्रम का परिणाम है।
गुरु-शिष्य परंपरा को बताया भारत की ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की गुरुकुल और गुरु-शिष्य परंपरा दुनिया की प्राचीनतम परंपराओं में शामिल है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों के माध्यम से प्राचीन भारत ने दुनिया के विद्यार्थियों को शिक्षा दी। उन्होंने मध्यप्रदेश की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी। महर्षि सांदीपनि ने अपने शिष्य में भविष्य का पुरुषार्थ और पराक्रम पहचाना। इसी प्रकार महर्षि विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया।
शिक्षकों की बेहतरी के लिए सरकार प्रतिबद्ध: उदय प्रताप सिंह
स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षक दिवस पूरे देश में गुरुजनों के सम्मान के रूप में मनाया जाता है। देश की युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाने में अभिभावकों और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव हो रहे हैं।
मध्यप्रदेश सरकार अच्छा काम करने वाले शिक्षकों का सम्मान कर रही है और शिक्षकों की बेहतरी के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बालाघाट सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षकों द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों का भी उल्लेख किया। मंत्री ने कहा कि विकसित भारत @2047 के संकल्प को पूरा करने में शिक्षकों की अहम भूमिका होगी।
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त शिक्षकों शीला पटेल और भैरूलाल ओसारा को भी समारोह में सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और 25 हजार रुपये की नगद सम्मान राशि प्रदान की गई। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री कुंवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, विधायक भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह सहित स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, सम्मानित शिक्षक और उनके परिजन मौजूद रहे।