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भोपाल में सीलिंग की कार्रवाई का विरोध: डी-मार्ट और शराब दुकानें भी नहीं खुलीं; व्यापारियों ने अर्थी निकाली

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भोपाल में सीलिंग की कार्रवाई का विरोध:   डी-मार्ट और शराब दुकानें भी नहीं खुलीं; व्यापारियों ने अर्थी निकाली

भोपाल के कोलार क्षेत्र में नगर निगम द्वारा जारी की गई सीलिंग कार्रवाई के विरोध में कोलार व्यापारी महासंघ ने आज पूरे बाजार को बंद कर दिया, जिसमें डी‑मार्ट, वी‑मार्ट, विशाल मेगामार्ट और कई शराब की दुकानों सहित सभी प्रतिष्ठान शटर बंद रखे गए।

यह विरोधात्मक बंद दोपहर के बाद भी जारी रहा, जबकि आपातकालीन सेवाओं जैसे मेडिकल क्लिनिक और पेट्रोल पंप को छूट दी गई थी। कोलार तिराहे से गोल जोड़ तक के सभी व्यापारिक इकाइयों ने इस आदेश का पालन नहीं किया और व्यापारियों ने आर्थिक सजावट के साथ प्रदर्शन किया।

महासंघ के अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि सीलिंग की कार्रवाई ‘गलत’ और ‘असमान’ है, क्योंकि यह केवल छोटे और मध्यम आकार के दुकानदारों को लक्षित कर रही है, जबकि बड़े व्यापारियों को छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कदम से रोज़ी‑रोटी का संकट उत्पन्न हो रहा है और इसलिए उन्होंने बाजार को बंद रखने का आह्वान किया।

पिछले मंगलवार को भी व्यापारी थाली और मंजीरा बजाते हुए विरोध प्रदर्शन कर चुके थे, और इस बार भी उन्होंने दो घंटे से अधिक समय तक रोशनपुरा चौराहे पर नारेबाजी की।

इस दौरान उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से व्यापार की अर्थी को सजाकर उसे कंधे पर लेकर विरोध दर्ज कराया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सीलिंग कार्रवाई से उनके व्यवसाय पर गंभीर आर्थिक दबाव बन रहा है। नगर निगम ने अब तक कुल 170 प्रतिष्ठानों को सील कर दिया है, जिसमें कई बड़े सुपरमार्केट और शराब की दुकानें भी शामिल हैं।

हालांकि, इन बड़े संस्थानों को भी बंद करने के बाद, व्यापारियों ने कहा कि यह कदम केवल छोटे व्यापारियों को ही प्रभावित कर रहा है, जबकि बड़े टैक्स‑देने वाले व्यापारी अभी भी संचालन में हैं।

ललिता नगर के ज्वैलर भानसिंह मीणा ने बताया कि कई दुकानों को 24‑घंटे का नोटिस दिया गया था, फिर भी वे टैक्स और बिजली के बिल समय पर चुका रहे हैं। व्यापारियों के समर्थन में करणी सेना परिवार के पदाधिकारियों ने भी मैदान में उतर कर दुकानों को बंद रखने का आह्वान किया।

प्रदेश उपाध्यक्ष चेतन सिंह राजपूत ने कहा कि इस कार्रवाई से लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं और उन्होंने प्रशासन से सीलिंग को पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पुलिस ने इस विरोध को शांतिपूर्ण बताया और कहा कि उन्होंने कोई हिंसक घटना नहीं देखी।

उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम की टीम ने सीलिंग के लिए आवश्यक कानूनी नोटिस जारी किया था, लेकिन व्यापारियों ने इसे ‘दिखावे की कार्रवाई’ कहा। पुलिस ने कहा कि यदि कोई उल्लंघन होता है तो उचित कार्रवाई की जाएगी, परन्तु वर्तमान में कोई गिरफ्तारी या जाँच की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।

नगर निगम ने कहा कि सीलिंग कार्रवाई का उद्देश्य टैक्स चोरी और अनधिकृत व्यापारिक गतिविधियों को रोकना है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी प्रतिष्ठानों को समान रूप से लागू किया जा रहा है, लेकिन कुछ बड़े संस्थानों को छूट दी गई है, जिससे व्यापारियों में असंतोष बढ़ा है।

निगम ने कहा कि आगे भी आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन साथ ही उन्होंने व्यापारियों से संवाद करने का प्रस्ताव भी रखा है।

सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को लेकर याचिका दायर करने वाले रहवासी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि नगर निगम केवल ‘दिखावे की’ कार्रवाई कर रहा है और यह छोटे व्यापारियों के विरुद्ध पक्षपाती है। उन्होंने कहा कि पूरी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी और न्यायालय से इस कार्रवाई को रोकने की मांग की गई है।

इस विरोध के कारण कोलार क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों में गंभीर ठहराव आया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कई ग्राहकों ने बताया कि वे आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए अन्य क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे कोलार के बाजार की आय में गिरावट आ रही है।

प्रशासनिक तौर पर, यह स्थिति नगर निगम और व्यापारियों के बीच तनाव को बढ़ा रही है, और स्थानीय प्रशासन को समाधान के लिए तेज़ी से कदम उठाने की आवश्यकता है। आगे की संभावना यह है कि यदि नगर निगम और व्यापारियों के बीच संवाद नहीं हुआ तो विरोध और विस्तारित हो सकता है, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ेगा।

दोनों पक्षों को मिलकर एक मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू करने की सलाह दी जा रही है, जिससे सीलिंग के कारण उत्पन्न समस्याओं का समाधान हो सके और व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य स्थिति में लाया जा सके।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।