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बीबीएमबी से हिमाचल को हर साल 600 से 800 करोड़ रुपये का फायदा, एससी ने दिया हिमाचल को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देने के आदेश

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 6 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बीबीएमबी से हिमाचल को हर साल 600 से 800 करोड़ रुपये का फायदा, एससी ने दिया हिमाचल को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देने के आदेश

नवंबर 06, शिमला (हिमाचल प्रदेश): भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। फैसले के तहत हिमाचल को करीब 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलनी है। इस फैसले से प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 60 करोड़ यूनिट बिजली मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता अनूप रतन ने इसे प्रदेश के लिए दिवाली का तोहफा करार दिया है। महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा कि बीबीएमबी का मामला वर्ष 1996 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। हिमाचल को पहले इस हिस्सेदारी के बदले नकद राशि मिलने की बात थी, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने फैसला लिया कि प्रदेश को पैसा नहीं, बल्कि बिजली मिलनी चाहिए।

बिजली की मांग और बाजार दर को देखते हुए यह निर्णय हिमाचल के लिए अधिक लाभदायक साबित होगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित किया कि बिजली अक्टूबर से मार्च के बीच मिले। यह वह अवधि है जब हिमाचल में बिजली की मांग और बाजार में दरें अधिक रहती हैं। उनके अनुसार, हिमाचल इस अवधि में बिजली बेचकर बेहतर कीमत प्राप्त कर सकेगा।

यदि औसतन 10 रुपये प्रति यूनिट की दर भी मानी जाए तो प्रदेश को हर साल 600 से 800 करोड़ रुपये तक का लाभ हो सकता है। अगले 20 वर्षों में यह लाभ करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि हिमाचल पहले नकद भुगतान के बजाय बिजली के रूप में हिस्सेदारी लेने के पक्ष में नहीं था, लेकिन अब बिजली की कीमत बढ़ने से प्रदेश को दीर्घकालीन फायदा होगा।

अनूप रतन ने कहा कि पहले केंद्र सरकार की ओर से तैयार प्रस्ताव में हिमाचल के हितों के अनुरूप व्यवस्था नहीं थी। उसमें अलग-अलग दरों के आधार पर नकद भुगतान का प्रावधान था। मुख्यमंत्री ने बिजली के रूप में हिस्सेदारी लेने का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने बीबीएमबी को आदेश दिया है कि हिमाचल को मिलने वाली बिजली तत्काल प्रभाव से देना शुरू किया जाए।

इसमें पिछली अवधि का बकाया भी शामिल है। उन्होंने कहा कि हरियाणा का समर्थन मिलने से कानूनी मामले में हिमाचल का पक्ष और मजबूत हुआ। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद बीबीएमबी को हिमाचल की बिजली हिस्सेदारी तुरंत जारी करनी होगी। उन्होंने इसे प्रदेश सरकार के प्रयासों और राजनीतिक नेतृत्व का परिणाम बताते हुए कहा कि यह फैसला हिमाचल के लिए बड़ी आर्थिक उपलब्धि है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के प्रोजेक्ट में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है, जिसके तहत राज्य को हर साल 600 से 800 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा और 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। यह निर्णय महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राज्य की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और बिजली की कमी दूर होगी। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक होगा: बिजली की कीमतें घटेंगी, उद्योगों को स्थिर आपूर्ति मिलेगी, और ग्रामीण इलाकों में रोशनी व आर्थिक विकास के नए अवसर खुलेंगे।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।