बिहार में इस बार नहीं पड़ेगी कड़ाके की ठंड:1950 के बाद आ रहा सबसे विनाशकारी 'सुपर अल-नीनो', जानें क्या है चेतावनी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
बिहार सहित देशभर से मानसून अब विदा हो रहा है। धीरे-धीरे तापमान गिर रहा है। हालांकि, कमजोर मानसून के बाद अब सर्दियों पर गहरा संकट मंडरा रहा है। प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा ‘सुपर अल-नीनो’ देश के मौसम चक्र को बिगाड़ सकता है। बिहार में इस बार कैसी पड़ेगी ठंडी और उसके पीछे क्या-क्या वजहें हैं, रबी फसलों पर क्या असर पड़ेगा; जानेंगे, बूझे की नाही में…। सवाल-1ः बिहार में सर्दी का सीजन कब से कब तक रहता है?
जवाबः आमतौर पर बिहार में सर्दी का मौसम नवंबर के आखिरी हफ्ते से शुरू होकर फरवरी के आखिरी हफ्ते तक चलता है। ये वो समय होता है जब तापमान में लगातार गिरावट आती है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी होती है और उत्तरी भारत में ठंडी हवाएं तेजी से बहने लगती हैं। मौसम वैज्ञानिक इसे 3 हिस्सों में बांटते हैं, ताकि तापमान और मौसम के पैटर्न को बेहतर तरीके से समझा जा सके... 1.
प्री-विंटर (20 नवंबर-20 दिसंबर) इस दौरान ठंड की हल्की दस्तक होती है। दिन में हल्की गर्मी और रात में ठंड बढ़ने लगती है। कोहरा और धुंध की शुरुआत हो जाती है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी शुरू हो जाती है, जिससे मैदानी इलाके जैसे-पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार-झारखंड में ठंडी हवाएं बहने लगती हैं। तापमान में धीरे-धीरे गिरावट होती है और लोगों की दिनचर्या में गर्म कपड़े शामिल होने लगते हैं। 2.
पीक-विंटर (20 दिसंबर-20 जनवरी) ये सर्दियों का सबसे ठंडा और तीखा दौर होता है। इस समय तापमान बिहार के कई जिलों में 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है और उत्तरी बिहार के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान शून्य के आसपास या उससे भी कम हो सकता है। पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है। ये वही मौसम प्रणाली है, जो पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं व बारिश लाती है। इस दौरान दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार-झारखंड जैसे राज्यों में ठंड चरम पर होती है। सुबह और रात में कोहरा इतना घना हो सकता है कि विजिबिलिटी बहुत कम हो जाती है। 3.
पोस्ट-विंटर (20 जनवरी-20 फरवरी) इस समय तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, लेकिन ठंडी हवाओं का असर बना रहता है। दिन के समय धूप तेज हो जाती है, पर सुबह और रातें ठंडी रहती हैं। कई बार इस दौरान भी पश्चिमी विक्षोभ के कारण हल्की बारिश और ठंड की वापस
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर बिहार में आने वाली ‘सुपर अल-नीनो’ के प्रभाव पर केंद्रित है, जो 1950 के बाद सबसे विनाशकारी माना जा रहा है। यह विषय बताता है कि कैसे प्रशांत महासागर की यह घटना देश के मौसम चक्र को बदल सकती है और सर्दियों की ठंड को बढ़ा सकती है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसानों, विशेषकर रबी फसल वाले क्षेत्रों में, फसल की पैदावार और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। आम जनता पर इसका असर तापमान में तेज गिरावट, बिजली की कमी, और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव के रूप में महसूस हो सकता है, जिससे जीवन‑या