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बिहार में चौर भूमि का होगा कायाकल्प, किसानों को 50% तक अनुदान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बिहार में चौर भूमि का होगा कायाकल्प, किसानों को 50% तक अनुदान

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बिहार में चौर भूमि का होगा कायाकल्प, किसानों को 50% तक अनुदान

मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना में मछली पालन, कृषि और बागवानी को बढ़ावा मिलेगा। एक हेक्टेयर चौर भूमि के विकास पर लाभुकों को 50% तक अनुदान मिलेगा।

24 सितंबर , पटना (पटना, बिहार) : बिहार सरकार राज्य में अव्यवहृत पड़ी चौर भूमि को उत्पादक संसाधन में बदलने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना लागू कर रही है। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।

योजना के माध्यम से राज्य में उपलब्ध निजी चौर भूमि को मत्स्य आधारित समेकित जलकृषि के लिए विकसित किया जाएगा। इसके तहत चौर क्षेत्रों में मछली पालन के साथ कृषि, बागवानी और कृषि वानिकी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। योजना का उद्देश्य चौर भूमि में उपलब्ध जल एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।

इसके लिए लाभुक आधारित चौर विकास और उद्यमी आधारित चौर विकास के मॉडल अपनाए जाएंगे। योजना के तहत चौर भूमि के विकास के साथ मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने पर भी जोर दिया गया है।

50 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान

योजना के तहत एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाबों के निर्माण के लिए 8.88 लाख रुपये, चार तालाबों के निर्माण के लिए 7.32 लाख रुपये तथा एक तालाब के निर्माण और भूमि विकास के लिए 9.69 लाख रुपये की इकाई लागत निर्धारित की गई है। सभी वर्ग के लाभुकों को निर्धारित इकाई लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। वहीं, उद्यमी आधारित चौर विकास मॉडल के तहत 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

व्यक्तिगत या समूह के रूप में आवेदन करने वाले लाभुकों को स्व-अभिप्रमाणित दो पासपोर्ट आकार के फोटो, आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र और समूह में कार्य करने की सहमति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

उद्यमी श्रेणी के आवेदकों को स्व-अभिप्रमाणित निबंधन प्रमाण-पत्र, पिछले तीन वर्षों का अंकेक्षण एवं आयकर रिटर्न, पैन कार्ड, जीएसटी संबंधी दस्तावेज, भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र तथा लीज एकरारनामा उपलब्ध कराना होगा।

प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों को प्राथमिकता

योजना के तहत चयन में मत्स्य प्रशिक्षण प्राप्त लाभुकों तथा मत्स्य आधारित उद्यम का अनुभव रखने वाले आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे योजना के तहत विकसित चौर क्षेत्रों में मत्स्य पालन को तकनीकी रूप से बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

इच्छुक आवेदक मत्स्य निदेशालय की वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य जानकारी के लिए आवेदक अपने नजदीकी जिला मत्स्य कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।

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Caption : मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना में मछली पालन, कृषि और बागवानी को बढ़ावा मिलेगा। एक हेक्टेयर चौर भूमि के विकास पर लाभुकों को 50% तक अनुदान मिलेगा।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

बिहार सरकार ने चौर भूमि के कायाकल्प की योजना शुरू की है, जिससे मछली पालन, कृषि और बागवानी को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना के तहत हर एक हेक्टेयर चौर भूमि के विकास पर किसानों को 50% तक अनुदान मिलेगा। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चौर भूमि का अव्यवहृत क्षेत्र को उत्पादक संसाधन में बदलकर किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण रोजगार सृजन संभव है। आम जनता के लिए इसका अर्थ है कि कृषि उत्पादकता बढ़ेगी, खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक विकास को नई ऊर्जा मिलेगी।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।