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बिहार की पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट:एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, बिल्डिंग के बाहर शव बिखरे; घनी आबादी के बीच थी फैक्ट्री

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बिहार की पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट:एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, बिल्डिंग के बाहर शव बिखरे; घनी आबादी के बीच थी फैक्ट्री

बिहार के सीवान में पटाखा बनाने के दौरान फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में पटाखा फैक्ट्री मालिक अमीरुद्दीन (70) के अलावे कल्लू, असरफ (10), मुस्कान ( 23) और खुशबू (13) शामिल हैं। पहले धमाके में 7 मौतों की जानकारी आई थी। पहले डीएम ने 3 मौतों की पुष्टि की, बाद में एसपी भारत सोनी ने हादसे में 5 लोगों की मौत की जानकारी दी है।

एक व्यक्ति के मलबे में दबे होने की आशंका है। मृतकों की पहचान की जा रही है। हादसा जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में हुआ। धमाके से पूरा मकान गिर गया। लोगों के शव सड़क पर बिखर गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुककर धमाके होते रहे।

फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर पाया काबू फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद मकान में आग लग गई। करीब डेढ़ घंटे तक धमाके होते रहे। घटना की सूचना के बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और करीब 4 घंटे बाद दमकल की मदद से आग पर काबू पाया। वहीं, सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता, महाराजगंज एसडीपीओ अमन और बड़हरिया, जामो, गोरेयाकोठी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची है।

एसडीपीओ ने बताया कि दमकल की गाड़ियां की मदद से आग पर काबू पाया गया। एसपी भारत सोनी ने बताया कि अब तक शवों की पहचान नहीं हो सकी है। जिस मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे, वह घनी आबादी वाले इलाके में है। थाना प्रभारी और चौकीदार निलंबित एसपी भारत सोनी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में थाना स्थर पर लापरवाही सामने आया है।

जामो थाना प्रभारी धीरज कुमार और चौकीदार द्वारिका मांझी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। हादसे की तस्वीरें… 9 माह पहले भी पटाखा फैक्ट्री में हुआ था ब्लास्ट सीवान में 22 जनवरी 2026 यानी 9 महीने पहले भी पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ था। इस हादसे में एक की मौत हुई थी। हुसैनगंज थाना इलाके में बडरम गांव में इतना जोरदार धमाका हुआ था।

इस हादसे में मरने वाले का सिर और पैर 20 फीट दूर जाकर गिरा था। धड़ के चिथड़े उड़ गए थे। मृतक की पहचान बड़रम गांव के जाल बदर के 50 साल के मुर्तुजा मंसूरी के रूप में हुई थी।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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