बिजनौर मेडिकल अस्पताल की सड़क टूटी, मरीजों को हो रही:दिक्कत पोस्ट मार्टम हाउस से महिला अस्पताल तक गहरे गड्ढे, जल्द निर्माण की मांग
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →बिजनौर जिला मेडिकल अस्पताल में करोड़ों रुपए की लागत से नई बिल्डिंग तैयार हो गई है। यहां पोस्ट मार्टम हाउस से लेकर महिला अस्पताल के सामने वाली सड़क टूटी हुई है। इससे मरीजों और राहगीरों को काफी परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों ने जल्द सड़क बनाने की मांग की है। जिला मेडिकल अस्पताल की नई बिल्डिंग तैयार होने के बाद डॉक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया है।
यहां बड़ी संख्या में मरीज भी आने लगे हैं। लेकिन, पोस्टमार्टम हाउस से लेकर महिला अस्पताल के सामने से होते हुए होम्योपैथिक अस्पताल तक की सड़क टूटी हुई है। इसमें जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। ई-रिक्शा और बाइक से इस रास्ते से आने-जाने के दौरान गड्ढों के कारण मरीजों को झटके लगते हैं।
इससे अस्पताल तक पहुंचने में भी दिक्कत होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की हालत खराब है, लेकिन अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है। सड़क पर गहरे गड्ढे होने से हादसे का खतरा बढ़ गया है। ई-रिक्शा और दोपहिया वाहन चालकों को संभलकर निकलना पड़ता है। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने वाला रास्ता ही खराब है। स्थानीय लोगों ने जिला अस्पताल प्रशासन और जिला प्रशासन से सड़क का जल्द निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मरीजों, गर्भवती महिलाओं और तीमारदारों की परेशानी को देखते हुए सड़क की मरम्मत सबसे पहले कराई जानी चाहिए।
समाजसेवी मुनीष त्यागी ने कहा कि अगर जल्द सड़क नहीं बनी तो उन्हें आंदोलन करना पड़ेगा। इस मामले में अस्पताल के सीएमएस और प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
बिजनौर के नए मेडिकल अस्पताल के निर्माण के बाद भी सड़क की टूट-फूट मरीजों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल रही है। यह हमें याद दिलाता है कि बुनियादी ढाँचे की देखभाल उतनी ही ज़रूरी है जितना इलाज। समाज को चाहिए कि वे सार्वजनिक सुविधाओं की निगरानी में सक्रिय रहें, समय पर मरम्मत के लिए आग्रह करें और सामूहिक प्रयास से सुरक्षित रास्ते बनाएं। इससे न केवल रोगी सुरक्षित रहेंगे, बल्कि समाज की जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ेगी।