बीना–भोपाल मेमो ट्रेन में भारी भीड़, धक्का-मुक्की से मुसाफिर परेशान
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गेट पर खड़े यात्रियों से महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों को दिक्कतें; टिकट चेकिंग और भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल भोपाल। त्योहारों के सीज़न के साथ-साथ आम दिनों में भी बीना–भोपाल मेमो ट्रेन में मुसाफिरों की भारी भीड़ परेशानी का सबब बनी हुई है।
ट्रेन में भीड़ का आलम यह है कि चढ़ने और उतरने के दौरान यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत आ जाती है।

मुसाफिरों के मुताबिक ट्रेन के दरवाज़ों पर बड़ी तादाद में लोग खड़े रहते हैं, जिसकी वजह से महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई बार अंदर जाने के लिए यात्रियों को भीड़ के बीच काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
यात्रियों ने आरोप लगाया कि ट्रेन में नियमित टिकट जांच नहीं होने की वजह से कुछ लोग बिना टिकट सफर करते हैं, जिससे पहले से मौजूद भीड़ और अव्यवस्था में इज़ाफा हो जाता है। यात्रियों का कहना है कि जीआरपी समेत संबंधित रेलवे अमले की तरफ से नियमित चेकिंग और भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त इंतज़ाम नजर नहीं आ रहे हैं।

त्योहारी दिनों में यात्रियों की तादाद और बढ़ने की संभावना को देखते हुए मुसाफिरों ने रेलवे प्रशासन से अतिरिक्त सुरक्षा इंतज़ाम, नियमित टिकट जांच और ट्रेन के गेट पर खड़े यात्रियों को व्यवस्थित करने की मांग की है, ताकि सफर के दौरान किसी अप्रिय घटना की स्थिति पैदा न हो।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
बीना–भोपाल मेमो ट्रेन में यात्रियों की भारी भीड़ और धक्का-मुक्की की घटनाएँ चल रही हैं, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों को असुविधा हो रही है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा और व्यवस्था के सवाल उठाता है, खासकर त्योहारों के मौसम में जब यातायात बढ़ता है। ऐसी भीड़भाड़ से यात्रियों को चोट लगने, टिकट चेकिंग में देरी और मनोवैज्ञानिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। इससे आम जनता पर नकारात्मक असर पड़ेगा, जैसे कि यात्रा में देरी, दुर्घटनाएँ और सार्वजनिक सेवाओं पर विश