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'BJP के गुडों ने पापा को मार डाला':पश्चिम बंगाल में CJP कार्यकर्ता अब्दुल के पिता ने सरकारी स्कूल के हालात दिखाए थे, 11 अरेस्ट

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

'स्कूल के लिए आवाज उठाने पर मेरे पापा को मार डाला। अफसोस है कि मैं उन्हें कभी गले नहीं लगा पाया, प्यार नहीं जता पाया। पापा ने सिखाया है, इसलिए अब हम स्कूलों की हालत सुधारकर रहेंगे। जहां अन्याय होगा, वहां अब्दुल खड़ा मिलेगा।' 25 साल के शेख अब्दुल हाफिज पिता को याद कर भावुक हो जाते हैं।

आरोप है कि गांव के सरकारी स्कूल की हालत दिखाने पर भड़के BJP कार्यकर्ताओं ने अब्दुल और उनके पिता शेख मोहम्मद मफीक से मारपीट की। गंभीर चोटों के चलते 15 अगस्त को मफीक की मौत हो गई। मामले में अब तक 11 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

अब्दुल कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के सदस्य हैं और पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के करीशुंडा गांव में रहते हैं। आरोपी भी इसी गांव के हैं। घटना के बाद गांव में डर का माहौल है। ज्यादातर आरोपियों के घरों पर ताले हैं और उनके परिवार गांव छोड़ चुके हैं। अब्दुल का परिवार अब किस हालत में है?

गांव के जिस सरकारी स्कूल से विवाद शुरू हुआ, उसकी क्या हालत है? और BJP का आरोपों पर क्या कहना है? यही जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड जीरो पर अब्दुल के गांव पहुंची। सबसे पहले अब्दुल की बात घटना के बाद 17 अगस्त को अब्दुल से मिलने CJP लीडर आशुतोष रांका भी गांव पहुंचे थे।

अब्दुल का गांव करीशुंदा कोलकाता से लगभग 150 किलोमीटर दूर बांकुरा जिले में पड़ता है। गांव में अब्दुल के घर पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। रास्ता कीचड़ से भरा हुआ है। पूरी बरसात यहां ऐसे ही हालात रहते हैं। गांव में पहुंचते ही हमें सबसे पहले भारी पुलिसबल दिखा।

अब्दुल के घर पर सुरक्षा के लिए पुलिस की तैनाती अब्दुल के घर के बाहर भी 2 पुरुष पुलिसकर्मी और एक महिला पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा कारणों से बिना एंट्री कराए और पुलिस से इजाजत लिए अब्दुल के घर नहीं जाने दिया जाता है।

अब्दुल के घर में उनकी मां और 21 साल की बहन हैं, इसके अलावा दिल्ली से पहुंचे 12 CJP कार्यकर्ता भी रुके हुए हैं। पिता का जिक्र हुआ तो मां ने बच्चों को गले लगाया घर वाले अब्दुल को रीक नाम से बुलाते हैं। बिना प्लास्टर वाले दो कमरे के घर में अब्दुल अपने पिता, मां और बहन के साथ रहते थे। बहन इसी साल नौकरी के लिए बाहर चली गई।

अब पिता के जाने के बाद अब्दुल और उनकी मां ही घर में बचे हैं। पिता के बारे में जिक्र होने पर ही अब्दुल की मां दोनों बच्चों को गले ल

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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