अपराध

बॉर्डर पर ड्रोन से हथियारों की तस्करी नाकाम, दो गिरफ्तार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बॉर्डर पर ड्रोन से हथियारों की तस्करी नाकाम, दो गिरफ्तार

खानुवाली पोस्ट के पास मिले तीन पैकेटों से दो तुर्की निर्मित जिगाना पिस्टल, चार मैगजीन और करीब 650 कारतूस बरामद

श्रीगंगानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र में ड्रोन के जरिए हथियारों की खेप गिराने की कथित साजिश का सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, सीमा सुरक्षा बल, राजस्थान पुलिस, सीआईडी और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। घटनास्थल से हथियारों और संदिग्ध विस्फोटक सामग्री के तीन पैकेट बरामद किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां संभावित सीमा पार नेटवर्क की जांच में जुटी हैं।

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के आईजी विकास कुमार के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां पिछले करीब एक महीने से संदिग्ध नेटवर्क पर निगरानी रख रही थीं। इसी दौरान रावला क्षेत्र में खानुवाली पोस्ट के पास ड्रोन के माध्यम से हथियारों की खेप गिराए जाने की सूचना सामने आई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रहे बीएसएफ जवानों ने कार्रवाई करते हुए दोनों युवकों को पकड़ लिया।

मौके से बरामद तीन पैकेटों में दो जिगाना पिस्टल, चार मैगजीन और करीब 650 कारतूस मिले हैं। पिस्टलों पर ‘मेड इन तुर्की’ लिखा होने की जानकारी भी सामने आई है। तीसरे पैकेट में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने की बात कही जा रही है। इसमें आरडीएक्स होने की आशंका जताई गई है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लखविंदर सिंह (19), निवासी फिरोजपुर, और सुखविंद्र सिंह (19), निवासी जालंधर के रूप में बताई गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में सक्रिय थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर हथियारों की खेप किसके निर्देश पर मंगाई गई थी और इसके पीछे कौन-सा नेटवर्क सक्रिय था।

घटना की गंभीरता को देखते हुए बीकानेर से बम निरोधक दस्ते को भी मौके पर बुलाया गया। विशेषज्ञ संदिग्ध सामग्री की जांच कर रहे हैं, ताकि उसकी वास्तविक प्रकृति का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही हथियारों की खेप में ड्रोन की भूमिका, आरोपियों के संभावित संपर्कों और बरामद सामग्री के इस्तेमाल के उद्देश्य की भी पड़ताल की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य इस मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान करना और सीमा पार से संचालित संभावित नेटवर्क का पता लगाना है। संदिग्ध विस्फोटक सामग्री को लेकर अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

बाईट : विकास कुमार (आईजी) एएनटीएफ

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।