देश

ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक जीत, पीएम मोदी ने दी बधाई

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक जीत, पीएम मोदी ने दी बधाई

अक्टूबर 26, नई दिल्ली: ब्राजील की सियासत में एक बार फिर लूला डा सिल्वा ने इतिहास रच दिया है। बेहद कांटे के मुकाबले में लूला ने दक्षिणपंथी खेमे को शिकस्त देकर सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लूला को इस जीत पर बधाई दी है। इस जीत के साथ लैटिन अमेरिका की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं।

यह चुनाव नतीजे बेहद नाटकीय मोड़ और विवादों के बीच सामने आए। मतदान के आखिरी समय में सुप्रीम कोर्ट के जज क्रिस्टियानो ज़ानिन ने वोटिंग का समय 2 घंटे बढ़ाने का आदेश दिया। लूला की टीम ने साओ पाउलो और साल्वाडोर में बस सेवाओं में हुई दिक्कत की वजह से समय बढ़ाने की मांग की थी, तो वहीं बोलसोनारो के समर्थकों ने दक्षिणी ब्राजील में भारी बारिश को कारण बताया।

इस फैसले से वोटों की गिनती 2 घंटे देर से शुरू हुई और मतदान केंद्रों पर काफी भ्रम की स्थिति देखने को मिली। बोलसोनारो के करीबी सहयोगियों ने जज जानिन के पुराने संबंधों पर सवाल भी उठाए हैं, जिसके चलते इस नतीजे को लेकर कानूनी जंग शुरू होने के भी कयास लगाए जा रहे हैं। लूला डा सिल्वा की इस शानदार जीत पर वैश्विक स्तर पर बधाइयों का तांता लग गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति लूला को जीत पर शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा और व्यापक बनाने के लिए लूला के साथ मिलकर काम करने की उत्सुकता ज़ाहिर की। पीएम ने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करेंगे, ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगे और एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत दुनिया के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

फाइल फोटो- लूला डा सिल्वा, राष्ट्रपति, ब्राजील

💡 पृष्ठभूमि (Background)

ब्राजील के राष्ट्रपति पद के चुनाव में लूला डा सिल्वा की जीत, जो दक्षिणपंथी उम्मीदवारों के खिलाफ एक ऐतिहासिक झटका है। यह विषय ब्राजील की राजनीति के बदलाव और लैटिन अमेरिका के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि लूला की सत्ता में वापसी से ब्राजील की विदेश नीति, आर्थिक नीतियाँ और सामाजिक कार्यक्रमों में बदलाव आएगा, और क्षेत्रीय गठबंधनों पर असर पड़ेगा। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि सामाजिक कल्याण योजनाएँ तेज हों, आर्थिक सुधारों में देरी हो, और निवेश के माहौल में बदलाव के

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।