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BRICS Summit 2026: भारत की वजह से पूरा नहीं हो पा रहा पाकिस्तान का सपना, जानें मोदी सरकार ने कैसे BRICS में किया खेला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 13 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
BRICS Summit 2026: भारत की वजह से पूरा नहीं हो पा रहा पाकिस्तान का सपना, जानें मोदी सरकार ने कैसे BRICS में किया खेला

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है.

भारत की मेजबानी में हो रहे इस सम्मेलन में दुनिया के कई प्रमुख देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं. इसी बीच पाकिस्तान की BRICS में शामिल होने की कोशिश एक बार फिर चर्चा में आ गई है.

पाकिस्तान ने करीब तीन साल पहले, यानी 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए औपचारिक आवेदन किया था, लेकिन अब तक उसे समूह में पूर्ण सदस्य के तौर पर जगह नहीं मिली है. पाकिस्तान ने क्यों मांगी BRICS की सदस्यता?

पाकिस्तान लंबे समय से BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच का हिस्सा बनने की कोशिश कर रहा है.

इस समूह में शामिल होने से उसे आर्थिक सहयोग बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और विकासशील देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने का मौका मिल सकता है.

पाकिस्तान के लिए BRICS की सदस्यता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ग्लोबल साउथ में तेजी से प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है.

BRICS का विस्तार होने के बाद इसका वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है. पाकिस्तान ने 2023 में औपचारिक रूप से सदस्यता के लिए आवेदन किया था.

इसके बाद उसने BRICS के मौजूदा सदस्य देशों से समर्थन जुटाने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी किए.

चीन और रूस से समर्थन, फिर भी नहीं बनी बात पाकिस्तान की BRICS सदस्यता की कोशिश में चीन और रूस का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है.

पाकिस्तान ने रूस के साथ भी अपनी कूटनीतिक बातचीत बढ़ाई है और BRICS में अपनी दावेदारी के लिए समर्थन हासिल करने की कोशिश की है. हालांकि, केवल कुछ देशों का समर्थन मिलना पर्याप्त नहीं है.

BRICS में नए सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा सदस्यों के बीच सहमति जरूरी होती है. ऐसे में भारत की सहमति पाकिस्तान की दावेदारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. भारत की मंजूरी क्यों अहम?

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव रहा है. इसी वजह से पाकिस्तान की BRICS सदस्यता का मामला भी आसान नहीं रहा है.

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, भारत पाकिस्तान की एंट्री का समर्थन नहीं कर रहा है, जिसके चलते उसकी सदस्यता की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है.

BRICS में नए देश को शामिल करने के लिए सर्वसम्मति की जरूरत होने के कारण किसी एक प्रमुख सदस्य की असहमति भी सदस्यता की राह रोक सकती है.

यही वजह है कि चीन और रूस के समर्थन के बावजूद पाकिस्तान अभी तक BRICS का हिस्सा नहीं बन पाया है.

BRICS का लगातार हो रहा विस्तार BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी.

इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश इसमें शामिल हुए.

भारत की आधिकारिक BRICS 2026 वेबसाइट भी समूह को 11 प्रमुख उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का मंच बताती है. समूह के विस्तार के साथ BRICS का आर्थिक और रणनीतिक महत्व बढ़ा है.

ऐसे में पाकिस्तान के लिए इस संगठन का सदस्य बनना कूटनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

भारत में हो रहे सम्मेलन के बीच पाकिस्तान की चर्चा दिल्ली में हो रहे मौजूदा BRICS सम्मेलन के बीच पाकिस्तान की सदस्यता का मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि भारत इस समय समूह की अध्यक्षता कर रहा है.

सम्मेलन में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हो रही है.

पाकिस्तान फिलहाल BRICS का सदस्य नहीं है और 2023 में किए गए उसके आवेदन पर अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है.

ऐसे में नई दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन एक बार फिर यह सवाल उठा रहा है कि पाकिस्तान को BRICS में जगह कब मिलेगी.

फिलहाल पाकिस्तान की सदस्यता की राह में सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा सदस्यों के बीच सहमति बनाना है. भारत की आपत्ति के चलते उसकी दावेदारी अटकी हुई है.

इसलिए चीन और रूस के समर्थन के बावजूद पाकिस्तान के लिए BRICS में प्रवेश आसान नहीं दिख रहा है.

📡 स्रोत: NewsData.io

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