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BRICS Summit 2026 | 7 साल बाद भारत आ रहे Xi Jinping! 67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ 24 घंटे की यात्रा, जानें मोदी-जिनपिंग वार्ता का पूरा एजेंडा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 11 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
BRICS Summit 2026 | 7 साल बाद भारत आ रहे Xi Jinping! 67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ 24 घंटे की यात्रा, जानें मोदी-जिनपिंग वार्ता का पूरा एजेंडा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आ रहे हैं। यह पिछले सात वर्षों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। यद्यपि बीजिंग ने उनकी यात्रा की सार्वजनिक पुष्टि काफी देर से की, लेकिन पृष्ठभूमि में इसकी कूटनीतिक तैयारियां हफ्तों पहले से ही जारी थीं।

मामले से अवगत सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने 27 अगस्त को ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ आ रहे 67 सदस्यीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल के लिए वीज़ा आवेदन दे दिया था। यह इस बात का स्पष्ट संकेत था कि बीजिंग ने आधिकारिक घोषणा से काफी पहले ही यात्रा की रूपरेखा तैयार कर ली थी।

राजनयिक सूत्रों ने 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' को बताया कि शनिवार शाम को शी की मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होनी है। इसे भी पढ़ें: Houthis Attack On Saudi Arabia | सऊदी-हूती जंग की आहट से कांपा पाकिस्तान! 'मक्का पैक्ट' पर 24 घंटे में बदल गए सुर, फिर हुई अंतरराष्ट्रीय फजीहत चीनी राष्ट्रपति के शनिवार को दोपहर 12:10 बजे नई दिल्ली पहुंचने और अगले दिन दोपहर 12:20 बजे रवाना होने की उम्मीद है, जिससे उनकी यात्रा ठीक 24 घंटे की होगी।

इस यात्रा के सिलसिले में एक अलग चीनी व्यापार प्रतिनिधिमंडल के भी भारत आने की उम्मीद है। शी के साथ चीन के वरिष्ठ अधिकारी भी होंगे, जिनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना की पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और शी के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में से एक, काई ची और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

चीनी प्रतिनिधिमंडल के शनिवार को दोपहर 2 बजे के आसपास 'भारत मंडपम' पहुंचने की उम्मीद है, जहां मोदी और अन्य नेता आने वाले सरकार प्रमुखों का स्वागत करेंगे। मोदी और शी के बीच द्विपक्षीय बैठक बहुपक्षवाद पर ब्रिक्स के बंद सत्र और शाम 7:30 बजे नेताओं के लिए मोदी द्वारा आयोजित रात्रिभोज के बीच होने की संभावना है।

शी के रात्रिभोज में शामिल होने की उम्मीद है। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit Restrictions | दिल्ली में सुरक्षा सख्त! 11 से 13 सितंबर तक क्या रहेगा खुला और क्या बंद?

स्कूल, दफ्तर, ट्रेन और मेट्रो के लिए क्या हैं नियम यात्रा की घोषणा देर से हुई, लेकिन तैयारियां हफ़्तों से चल रही थीं बीजिंग की सार्वजनिक घोषणा के समय ने इस बात पर अटकलें तेज़ कर दी थीं कि चीन ने शी की भागीदारी की पुष्टि करने में इतना समय क्यों लिया। हालांकि, तैयारियों से वाकिफ लोगों ने 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' को बताया कि बीजिंग ने हफ़्तों पहले ही भारतीय पक्ष को उनकी भागीदारी के बारे में औपचारिक रूप से सूचित कर दिया था।

शी के प्रतिनिधिमंडल के लिए 27 अगस्त को किया गया वीज़ा अनुरोध इस बात का अहम संकेत था कि यात्रा की तैयारियां पहले से ही चल रही थीं। उम्मीद है कि शी की यह यात्रा, 2024 में कज़ान में ब्रिक्स समिट के दौरान मोदी के साथ हुई उनकी मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों में आए सुधार को और आगे बढ़ाएगी।

उस मुलाकात में पूर्वी लद्दाख में 2020 के सैन्य गतिरोध से जुड़े मुद्दों को सुलझाने और दोनों देशों के बीच बातचीत को फिर से शुरू करने की व्यापक कोशिश की गई थी। उम्मीद है कि शी के साथ बैठक में मोदी निष्पक्ष मार्केट एक्सेस, सप्लाई-चेन की विश्वसनीयता और द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन जैसे मुद्दों पर चिंता जताएंगे, क्योंकि दोनों पक्ष आर्थिक संबंधों को बढ़ाना चाहते हैं।

कज़ान में, दोनों नेता उच्च-स्तरीय बातचीत को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए और भारत-चीन सीमा विवाद पर अपने विशेष प्रतिनिधियों को सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की निगरानी का काम सौंपा। भारत का मानना ​​रहा है कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक विकास के लिए ज़रूरी है।

विशेष प्रतिनिधियों से सीमा विवाद का निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए भी कहा गया। दोनों पक्ष अपने विदेश मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए। तब से, विशेष प्रतिनिधियों ने सीमा वार्ता के तीन दौर किए हैं। अगस्त में हुई उनकी हालिया बैठक के आठ नतीजे निकले, जिनमें सीमा के सीमांकन और सीमा प्रबंधन पर जल्द और ठोस नतीजे के लिए 'टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस' (काम की रूपरेखा) को अंतिम रूप देने का फ़ैसला भी शामिल है।

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📡 स्रोत: NewsData.io

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