ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दूर रहेंगे बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान, विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने किया बड़ा खुलासा
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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय कूटनीतिक संबंधों के गलियारों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जिसके तहत पड़ोसी देश बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत की मेजबानी में होने वाले आगामी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे। इस बात को लेकर पिछले कुछ दिनों से कयासों और चर्चाओं का दौर गर्म था कि क्या बांग्लादेश के शीर्ष नेतृत्व को इस वैश्विक मंच के लिए औपचारिक निमंत्रण मिला है या नहीं।
इस बीच, बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने मीडिया के सामने स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए एक सनसनीखेज और स्पष्ट बयान दिया है। राज्य मंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान दो टूक शब्दों में यह दावा किया है कि उनके देश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को इस प्रतिष्ठित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए कोई व्यक्तिगत या सीधा निमंत्रण प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए उनके इस सम्मेलन में शामिल होने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
इस आधिकारिक बयान के सामने आने के बाद दक्षिण एशिया की भू-राजनीति और भारत-बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक समीकरणों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है, क्योंकि जानकारों का मानना है कि वैश्विक मंचों पर पड़ोसी देशों की उपस्थिति और अनुपस्थिति दोनों के ही कूटनीतिक मायने होते हैं। बिम्सटेक (BIMSTEC) के अध्यक्ष के रूप में आया था निमंत्रण, पीएम तारिक रहमान को नहीं मिला व्यक्तिगत आमंत्रण इस पूरे विवाद पर से पर्दा उठाते हुए बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने विस्तार से बताया कि भारत की तरफ से जो आमंत्रण भेजा गया था, उसका स्वरूप और संदर्भ अलग था।
उन्होंने पत्रकारों के तीखे सवालों का जवाब देते हुए कहा, "आखिर आपको किसने यह जानकारी दी कि हमारे प्रधानमंत्री को ब्रिक्स सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया था?
क्या बांग्लादेश सरकार के पास या हमारे प्रधानमंत्री कार्यालय को कोई ऐसा सीधा आमंत्रण मिला है?
सच्चाई यह है कि हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया है।" मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो निमंत्रण प्राप्त हुआ था, वह दरअसल बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल यानी 'बिम्सटेक' (BIMSTEC) के मौजूदा अध्यक्ष की हैसियत से था, न कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में किसी द्विपक्षीय या विशेष ब्रिक्स आमंत्रण के तौर पर।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि चूंकि निमंत्रण संस्थागत और क्षेत्रीय सहयोग संगठन के मुखिया के नाते था, इसलिए बांग्लादेश इस महत्वपूर्ण वैश्विक मंच पर पूरी तरह से अनुपस्थित नहीं रहेगा, बल्कि देश की तरफ से एक आधिकारिक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचेगा, लेकिन प्रधानमंत्री तारिक रहमान खुद इस यात्रा पर नहीं जाएंगे।
भारत मंडपम में आयोजित हो रहा है 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, दुनिया भर के दिग्गज नेताओं के जुटने की उम्मीद भारत की राजधानी नई दिल्ली के अत्याधुनिक और भव्य सांस्कृतिक केंद्र 'भारत मंडपम' में 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जो वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक ताकत का प्रतीक है।
इस वर्ष के इस अत्यंत प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मेलन का मुख्य केंद्रीय विषय (थिम) 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' रखा गया है, जिसके तहत दुनिया के उभरते हुए और प्रमुख आर्थिक संगठनों के बीच आपसी तकनीकी, वित्तीय और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
भारत की इस मेगा कूटनीतिक मेजबानी में भाग लेने के लिए दुनिया भर के कई प्रमुख देशों के शीर्ष राष्ट्राध्यक्षों, शासन प्रमुखों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के नई दिल्ली पहुंचने की पूरी उम्मीद है। वैश्विक शांति, आर्थिक स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग के लिहाज से इस शिखर सम्मेलन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति, डिजिटल अर्थव्यवस्था, और वैकल्पिक वित्तीय प्रणालियों जैसे गंभीर मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होने की पूरी संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना बांग्लादेश का यह फैसला द डेली स्टार सहित क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद और क्षेत्रीय कूटनीति के विभिन्न आयामों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान इस शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो रहे हैं, लेकिन ब्रिक्स जैसे वैश्विक मंच पर भारत की यह अध्यक्षता और पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाने के प्रयास दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक भविष्य को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों का यह भी कहना है कि बिम्सटेक के जरिए बहुपक्षीय मंचों पर देशों की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक सामान्य और नियमित हिस्सा है, जिसे किसी प्रकार की राजनीतिक दूरी के रूप में देखा जाना पूरी तरह से उचित नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत और अन्य वैश्विक नेताओं के बीच किन-किन अहम समझौतों पर मुहर लगती है और क्षेत्रीय कूटनीति किस नए दिशा में आगे बढ़ती है।
📡 स्रोत: NewsData.io