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ब्रिटिश नागरिकता और जमीन-खरीद मामले में मौलाना की रिट खारिज:इलाहाबाद हाईकोर्ट में पैरवी के लिए नहीं पहुंचे वकील; 2024 में FIR पर मिली अंतरिम राहत भी खत्म

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ब्रिटिश नागरिकता और जमीन-खरीद मामले में मौलाना की रिट खारिज:इलाहाबाद हाईकोर्ट में पैरवी के लिए नहीं पहुंचे वकील; 2024 में FIR पर मिली अंतरिम राहत भी खत्म

संतकबीरनगर के खलीलाबाद थाने में दर्ज ब्रिटिश नागरिकता और जमीन खरीद से जुड़े मामले में मौलाना शमशुल हुदा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने उनकी आपराधिक विविध रिट याचिका को पैरवी के अभाव में खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पक्ष में पहले कोई अंतरिम आदेश पारित हुआ था तो वह अब समाप्त माना जाएगा।

12 अगस्त 2026 को कोर्ट संख्या-49 में न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के समय याचिकाकर्ता की ओर से वकील मौजूद नहीं अदालत के आदेश के मुताबिक, सुनवाई के समय याचिकाकर्ता की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं था, जबकि सरकारी पक्ष के वकील मौजूद थे।

पैरवी नहीं किए जाने के कारण कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। यह मामला खलीलाबाद थाने में 7 अप्रैल 2024 को दर्ज केस क्राइम नंबर 288/2024 से जुड़ा है। एफआईआर में IPC की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। 2024 में FIR पर दंडात्मक कार्रवाई से मिली थी अंतरिम राहत 24 अक्टूबर 2024 की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अगली तारीख तक मौलाना शमशुल हुदा खान के खिलाफ उक्त एफआईआर के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था।

अब रिट याचिका खारिज होने के साथ यह अंतरिम राहत भी समाप्त हो गई है। ब्रिटिश नागरिकता और जमीन खरीद को लेकर लगाए गए थे आरोप मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि मौलाना शमशुल हुदा खान ने ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बाद भारत में जमीन खरीदी और इसके लिए सरकार की पूर्व अनुमति नहीं ली।

याचिका की पूर्व सुनवाई में इस बात पर भी बहस हुई थी कि नागरिकता की स्थिति और जमीन खरीद से जुड़े विवाद का निर्धारण संबंधित कानूनों के तहत होना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के प्रावधानों का भी हवाला दिया गया था। संबंधित पक्षों ने संपत्ति खरीद और नागरिकता की स्थिति को लेकर अलग-अलग दलीलें कोर्ट के सामने रखी थीं।

संपत्ति और मदरसा जमीन से जुड़े मामले अलग-अलग मामले की पूर्व सुनवाई में यह भी बताया गया था कि संबंधित संपत्ति सोसायटी के नाम पर खरीदी गई थी और जमीन को लेकर मंडलायुक्त, बस्ती के समक्ष पुनरीक्षण की कार्यवाही भी हुई थी। इसके अलावा मदरसा की जमीन और भवन से जुड़े प्रशासनिक आदेशों को लेकर अलग न्यायिक कार्यवाही चल रही है।

अगस्त 2026 में एसडीएम खलीलाबाद की अदालत ने संबंधित संस्था के नाम कृषि भूमि के बैनामे को निरस्त करते हुए जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया था। इस आदेश को लेकर भी आगे की न्यायिक प्रक्रिया अलग से चल रही है। अगली कार्रवाई: मौजूदा हाईकोर्ट आदेश के बाद 2024 की एफआईआर पर मिली अंतरिम राहत समाप्त हो चुकी है।

मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित न्यायिक और जांच प्रक्रिया के अनुसार होगी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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