आज बुक कराना है 14.2 किलो वाला सिलेंडर? पहले चेक कर लें रेट
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त्योहारी सीजन से पहले देश के आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है क्योंकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
इसकी कीमतें पिछले जून के महीने से स्थिर हैं. जबकि इस दफा 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के रेट कई बार बढ़ाए गए.
सबसे पहले 1 सितंबर को 9.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई.
फिर अक्टूबर में 62.50 रुपये का इजाफा किया गया और अब नवंबर में भी 10 रुपये की भी बढ़ोतरी की गई.
इससे पहले जुलाई में इसकी कीमतों में 183.50 रुपये और अगस्त में 192 रुपये की कटौती की जा चुकी है.
बेशक, कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बजट पर नहीं पड़ता, लेकिन इससे होटल, बेकरी, ढाबे और कैटरिंग जैसी व्यावसायिक गतिविधियों की लागत बढ़ जाती.
कमर्शियल सिलेंडर के क्यों बढ़ रहे दाम?
भारत में एलपीजी की कीमतें मुख्य रूप से सऊदी अरामको द्वारा हर महीने घोषित किए जाने वाले 'सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस' पर निर्भर करती हैं.
सऊदी अरामको ने नवंबर महीने के लिए प्रोपेन की कीमतों में 5.9% (बढ़कर 720 डॉलर प्रति टन) और ब्यूटेन की कीमतों में 6.8% (बढ़कर 780 डॉलर प्रति टन) की भारी बढ़ोतरी की है.
साथ ही अल्जीरिया की सरकारी ऊर्जा कंपनी सोनाट्रैक (Sonatrach) ने भी गैस कीमतों में 23% से 40% तक का इजाफा किया है. इन सबके चलते भारतीय तेल कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ गई है.
पश्चिम एशिया में तनाव भी कीमतों में इस बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार है.
चूंकि भारत अपनी जरूरत की LPG का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, जिसका लगभग 90% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग से होकर गुजरता है.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस समुद्री रास्ते से होकर एनर्जी सप्लाई का जोखिम बढ़ता जा रहा है. इस क्रम में जहाजों का बीमा प्रीमियम और मालभाड़ा भी काफी बढ़ गया है.
ऊपर से भारत में अभी त्योहारी सीजन के मद्देनजर होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और कैटरिंग सेवाओं में कमर्शियल सिलेंडरों की मांग काफी बढ़ गई है.
महंगे आयात के बीच अगर मांग बढ़ेगी, तो तेल कंपनियां मुनाफे के दबाव को कम करने के लिए कीमतों में
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar