चक्रवात अर्नब का भीषण लैंडफॉल: 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं, आंध्र में तबाही; ओडिशा से यूपी तक हाई अलर्ट
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विशाखापट्टनम/विशेष संवाददाता। बंगाल की खाड़ी से उठा भीषण चक्रवाती तूफान 'अर्नब' (Cyclone Arnab) पूरी ताकत के साथ आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से टकरा गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, तूफान के लैंडफॉल की प्रक्रिया बुधवार तड़के काकीनाडा और यनम के बीच शुरू हुई, जिसके चलते तटीय जनपदों में 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल रही हैं, जबकि झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई है।
विशाखापट्टनम के आरके बीच से लेकर काकीनाडा, अमलापुरम और कोनासीमा तक समंदर में कई मीटर ऊंची विनाशकारी तूफानी लहरें उठ रही हैं। समुद्र के उग्र रूप को देखते हुए प्रशासन ने समुद्र तटों पर लोगों के जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। लैंडफॉल शुरू होते ही विशाखापट्टनम में 216 मिमी और कलिंगपटनम में लगभग 148 मिमी से अधिक मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है।
चक्रवात के चलते सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए हैं, जिससे कई प्रमुख राजमार्गों और तटीय मार्गों पर यातायात ठप हो गया है। 15 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा, 1.5 लाख लोग सुरक्षित कैंपों में शिफ्ट आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन.
चंद्रबाबू नायडू ने आपदा नियंत्रण कक्ष से लगभग 32,000 कर्मियों और सभी जिलाधिकारियों के साथ आपात बैठक की है। मौसम विभाग ने राज्य के 15 प्रमुख जिलों—विशाखापट्टनम, काकीनाडा, कोनासीमा, पूर्वी व पश्चिमी गोदावरी, एलुरु, बापटला, गुंटूर, कृष्णा और एनटीआर सहित अन्य तटीय जनपदों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का गंभीर अलर्ट जारी किया है।
प्रशासन ने लैंडफॉल से पहले ही लगभग 1.5 लाख नागरिकों को तटीय और निचले इलाकों से सुरक्षित निकालकर 1,700 से अधिक राहत शिविरों में पहुंचा दिया था। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि तूफान की गति धीमी पड़ते ही राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य सड़कों पर गिरे पेड़ों को दो घंटे के भीतर हटाया जाए और क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों को तुरंत बहाल किया जाए।
एहतियात के तौर पर विशाखापट्टनम और विजयवाड़ा हवाई अड्डों से दर्जनों उड़ानों को रद्द कर दिया गया है, जबकि दर्जनों ट्रेनों के मार्ग बदले गए हैं। ओडिशा में रेड वार्निंग, 16 जिलों में स्कूल बंद चक्रवात अर्नब के लैंडफॉल का सीधा और गंभीर असर पड़ोसी राज्य ओडिशा पर भी पड़ा है। ओडिशा सरकार ने दक्षिणी और तटीय इलाकों के 16 जिलों में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित कर दी है।
पुरी, गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जैसे संवेदनशील जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है। ओडिशा के प्रसिद्ध पुरी और गोपालपुर समुद्र तटों पर खतरे के लाल झंडे लगा दिए गए हैं और पर्यटकों को तटों से पूरी तरह दूर कर दिया गया है। राज्य में एनडीआरएफ, ओड्राफ (ODRAF) और दमकल विभाग की 290 से अधिक विशेष टीमों को हाई अलर्ट पर तैनात किया गया है।
राहत शिविरों में हजारों लोगों को ठहराने, शुद्ध पेयजल, सूखा राशन और बैकअप जनरेटर की पुख्ता व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली तक बदलेगा मौसम का मिजाज चक्रवाती तूफान 'अर्नब' की तीव्रता इतनी अधिक है कि इसका असर सिर्फ प्रायद्वीपीय भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका चक्रवाती घेरा मध्य और उत्तर भारत के मौसम को भी बुरी तरह प्रभावित करने जा रहा है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, अर्नब उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के रास्ते उत्तर प्रदेश की सीमा में नमी लाएगा। इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य भागों में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में अगले दो दिनों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी करते हुए प्रशासन ने आम जनता से गैर-जरूरी कार्यों के लिए घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।
राजधानी लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और मिर्जापुर में बादलों की आवाजाही के साथ गरज-चमक और बूंदाबांदी के आसार बन रहे हैं। इसके साथ ही, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और चक्रवात अर्नब के संयुक्त प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर और पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश में भी अगले 48 से 72 घंटों के दौरान आसमान में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
रेलवे और विमान सेवाओं पर पड़ा भारी असर, हेल्पलाइन जारी तूफान के चलते पूर्वी तटीय रेलवे ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा से गुजरने वाली 80 से अधिक ट्रेनों को या तो निरस्त कर दिया है या शॉर्ट-टर्मिनेट किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्थिति की समीक्षा करते हुए विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर, हैदराबाद, वाराणसी और प्रयागराज जाने वाली उड़ानों के संचालन पर कड़ी निगरानी रखने और यात्रियों को समय पर सूचना देने के निर्देश दिए हैं।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने तटीय और अलर्ट वाले सभी जनपदों में 24 घंटे चालू रहने वाले आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। प्रशासन ने नागरिकों को कच्चे मकानों, पुराने और जर्जर ढांचों, बड़े होर्डिंग्स और विशाल पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सख्त सलाह दी है। समंदर में 30 अक्टूबर तक ऊंची लहरों और तेज तूफानी हवाओं का दौर बने रहने की संभावना के कारण मछुआरों को बंगाल की खाड़ी में बिल्कुल न जाने की चेतावनी दी गई है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि दोपहर तक चक्रवात की तीव्रता कुछ कम होकर यह चक्रवाती डिप्रेशन में तब्दील हो सकता है।
📡 स्रोत: NewsData.io