व्यापार

चम्बा चप्पल की बाजार में भारी मांग

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 12 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
चम्बा चप्पल की बाजार में भारी मांग

अक्तूबर 12, चंबा (हिमाचल प्रदेश): जी आई उत्पादों को विरासत से बाजार तक ले जाने के लिए नाबार्ड ने कामगारों को एक बेहतर मंच उपलब्ध करवाया है। इसके लिए हैदराबाद में ग्रामीण भारत महोत्सव का आयोजन चल रहा है। महोत्सव के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में 51 स्टॉल लगाए गए हैं जिनमें देश भर के 35 जीआई उत्पाद प्रदर्शित किए गए।

आकांक्षी जिला चम्बा को भी इसमें भाग लेने का मौका मिला है और जी आई टैग चम्बा चप्पल के कारीगर अनिल कुमार यहां हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह प्रदर्शनी भारत के पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और क्षेत्र विशेष के उत्पादों की समृद्ध विविधता को दर्शाती है। ग्रामीण भारत महोत्सव में प्रदर्शित की गई चम्बा चप्पल को लोग काफी पसंद कर रहे हैं और इसकी जमकर खरीददारी भी कर रहे हैं।

महोत्सव में भाग ले रहे चम्बा चप्पल के कारीगर अनिल कुमार ने हैदराबाद में मंच देने के लिए नाबार्ड का आभार जताया। उन्होंने कहा कि 14 अक्तूबर तक चलने वाले इस महोत्सव में उन्हें प्रदर्शनी एवं बिक्री पटल मुहैया करवाया गया है जिसके माध्यम से वह अपना उत्पाद बेच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चम्बा चप्पल बड़ी मेहनत से तैयार की जाती है और बाहरी बाजार में इसकी मांग भी बहुत है जिसका ऊन जैसे कारीगरों को भी काफी लाभ मिलता है।

बाइट: अनिल कुमार, चम्बा चप्पल कारीगर

💡 पृष्ठभूमि (Background)

चंबा चप्पल, हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक हस्तशिल्प, को जीआई टैग मिला है और इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने के लिए नाबार्ड ने कामगारों को मंच दिया है। यह कदम चंबा के ग्रामीण उद्योग को नई पहचान और आर्थिक अवसर देता है। इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि जीआई टैग से उत्पाद की विशिष्टता और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है, जिससे निर्यात क्षमता बढ़ती है और स्थानीय कारीगरों की आय में सुधार होता है। आम जनता पर इसका असर यह है कि रोजगार के नए सिरे से अवसर मिलेंगे, स्थानीय संस्कृति का संरक्षण होगा और

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।