चांदी 50% सस्ती, जनवरी से आधी रह गई कीमत, खरीदें या और इंतजार करें?
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जनवरी 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने वाली चांदी की कीमतों में अब बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है.
इस साल की शुरुआत में जिस कीमती धातु को निवेशकों के बीच काफी पसंद किया जा रहा था, उसकी कीमत अक्टूबर तक आधे से भी ज्यादा नीचे आ गई है.
ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि क्या इस गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखना चाहिए या बाजार में स्थिरता आने तक इंतजार करना बेहतर होगा.
चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण हैं. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं.
इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने या उनमें बढ़ोतरी किए जाने की आशंका मजबूत हुई है.
जब ब्याज देने वाले निवेश विकल्प आकर्षक बनते हैं, तब सोने और चांदी जैसी धातुओं की मांग पर दबाव पड़ सकता है. इनसे नियमित ब्याज या आय नहीं मिलती.
इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रही है.
रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आई चांदी की कीमत
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत 29 जनवरी 2026 को करीब 3,84,632 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी.
हालांकि, 27 अक्टूबर तक इसका भाव गिरकर लगभग 1,90,847 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया. इस तरह कुछ ही महीनों में कीमत में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.
कीमतों में आई इस बड़ी कमी ने उन निवेशकों का ध्यान खींचा है, जो लंबे समय के लिए चांदी में पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं.
हालांकि, केवल कीमत गिरने को निवेश का सही संकेत मानना जोखिम भरा हो सकता है.
अभी खरीदें या कुछ समय इंतजार करें?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कीमतों में भारी गिरावट के बाद भी यह तय नहीं है कि चांदी का भाव अब और नीचे नहीं जाएगा.
इसलिए एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा संतुलित रणनीति हो सकती है.
निवेशको
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar