चारा काटने गए अधेड़ की तालाब में डूबने से मौत:5 घंटे की मशक्कत के बाद SDRF ने बॉडी निकाला, बाढ़ के पानी से नहीं दिखा तालाब
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →गोपालगंज के बरौली थाना क्षेत्र स्थित देवापुर गांव के पास चंवर में मंगलवार को मवेशियों के लिए चारा काटने गए एक अधेड़ व्यक्ति की गहरे तालाब में डूबने से मौत हो गई। बाढ़ के पानी का फैलाव अधिक होने के कारण जलमग्न तालाब का अंदाजा नहीं मिलने से यह दुर्घटना घटी। मृतक की पहचान देवापुर गांव निवासी स्व.
विजयी ठाकुर के 58 वर्षीय बेटा सत्यदेव ठाकुर के रूप में की गई है। दरअसल इस संदर्भ में बताया जाता है कि सत्यदेव ठाकुर रोज की तरह अपने मवेशियों के लिए हरा चारा काटने गांव के पास स्थित चंवर की ओर गए थे। पानी का स्तर अधिक होने से गहरे तालाब में समाया इलाके में आए बाढ़ के पानी के कारण चारों तरफ जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
चारा काटने के दौरान जैसे ही वे आगे बढ़े, पानी का बहाव और गहराई समझ नहीं सके। बाढ़ का पानी पूरे मैदान में पसरा होने के कारण जलमग्न तालाब दिखाई नहीं दिया और उनका पैर सीधे गहरे पानी में फिसल गया। डूबने के दौरान उन्होंने खुद को बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी का स्तर अधिक होने से वे गहरे तालाब में समा गए।
आस पास मौजूद लोगों ने शोर मचाया तब तक वो लापता हो गए। इस दौरान स्थानीय गोताखोरो द्वारा काफी तलाश की गई लेकिन पता नहीं चल सका जिसके बाद बरौली पुलिस को सूचना दी। SDRF ने सघन खोजबीन अभियान किया शुरू घटना की गंभीरता को देखते हुए बरौली थाना की पुलिस ने तत्काल एसडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलवाया।
SDRF के गोताखोरों ने नाव और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से तालाब के गहरे पानी में सघन खोजबीन अभियान शुरू किया। लगभग पांच घंटे की कड़ी मशक्कत और अथक प्रयास के बाद गोताखोरों ने सत्यदेव ठाकुर के शव को पानी से बाहर निकाला। शव के बाहर निकलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और गांव का माहौल गमगीन हो गया।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए गोपालगंज सदर अस्पताल भेज दिया है। स्थानीय अंचलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना जताई और सरकारी प्रक्रिया के तहत मिलने वाले मुआवजे का आश्वासन दिया है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
बाढ़ के बाद भी जब पानी की गहराई स्पष्ट न हो, तो किसी भी काम को टालना या सुरक्षित तरीकों से करना ज़रूरी है। जोखिम भरे कार्यों में सहकर्मी या परिवार के साथ मिलकर योजना बनाना, सूचित रहना और बचाव उपकरण साथ रखना जीवन बचा सकता है। इस घटना से हमें यह सिखने को मिलता है कि प्रकृति के साथ सहमति से काम करना, आपातकालीन योजनाएँ बनाना और एक-दूसरे की मदद करना समाज की ताक़त है।