चरणसिंह स्मारक किसान चेतना और ज्ञान परंपरा का प्रतिबिंब होगा

जयंत चौधरी के सामने सीकर में प्रस्तावित प्रतिमा और स्मारक का 3D मॉडल प्रस्तुत किया गया। स्मारक में चौधरी चरणसिंह के जीवन, किसान-केंद्रित चिंतन, सामाजिक दर्शन और विचार परंपरा को प्रमुखता देने की योजना। सीकर, 24 अगस्त।
भारत रत्न चौधरी चरणसिंह स्मृति संस्थान, सीकर के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार एवं शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान सीकर के रामू का बास तिराहे पर प्रस्तावित भारत रत्न चौधरी चरणसिंह की प्रतिमा एवं स्मारक की विस्तृत परिकल्पना उनके सामने रखी। प्रतिनिधिमंडल की ओर से प्रस्तावित स्मारक का 3D प्रस्तुतीकरण भी किया गया।
इसमें स्मारक के वास्तुशिल्पीय स्वरूप के साथ पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह के ऐतिहासिक जीवन, किसान-केंद्रित चिंतन, सामाजिक दर्शन और ज्ञान-विचार की परंपरा को प्रमुखता से प्रदर्शित करने की योजना बताई गई।
इस दौरान प्रो. नंदकिशोर मातवा, इंजीनियर हेमाराम रणवा और युवा उद्यमी अनिल धीवां ने जयंत चौधरी को प्रस्तावित स्मारक की डिजाइन और उसकी वैचारिक अवधारणा के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि स्मारक को केवल प्रतिमा स्थल के रूप में विकसित करने के बजाय चौधरी चरणसिंह के विचारों और किसान हितों से जुड़े उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है।
प्रस्तावित स्मारक में चौधरी चरणसिंह के जीवन और उनके किसान-केंद्रित विचारों को प्रमुख स्थान देने की योजना है। उनके सामाजिक चिंतन और ज्ञान परंपरा को भी स्मारक की संरचना और प्रस्तुतीकरण का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि यहां आने वाले लोगों को उनके व्यक्तित्व और विचारों के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिल सके।
मुलाकात के दौरान जयंत चौधरी ने प्रस्तावित स्मारक की अवधारणा को लेकर कहा कि “चौधरी चरणसिंह स्मारक उनके ऐतिहासिक विचारों, किसान चेतना और ज्ञान परंपरा का जीवंत प्रतिबिंब होगा।” उन्होंने स्मारक की परिकल्पना में चौधरी चरणसिंह के विचारों और किसान समाज के प्रति उनके योगदान को केंद्र में रखने के प्रयास को महत्वपूर्ण बताया।
प्रतिनिधिमंडल ने स्मारक के प्रस्तावित स्वरूप, डिजाइन और वैचारिक पक्ष को लेकर मंत्री के साथ विस्तार से चर्चा की। इस दौरान स्मारक को सीकर की पहचान और चौधरी चरणसिंह के विचारों से जोड़ते हुए विकसित करने की दिशा में विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रस्तावित स्मारक के निर्माण से चौधरी चरणसिंह के जीवन, किसान चेतना और उनके सामाजिक एवं वैचारिक योगदान को स्थानीय स्तर पर संरक्षित करने के साथ युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार स्मारक को ऐसा स्वरूप देने की योजना है, जहां प्रतिमा के साथ उनके विचारों और योगदान की जानकारी भी लोगों को उपलब्ध हो सके।