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चतुर्थ श्रेणी से क्लास-वन तक 12 माह का वेतन, तो मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को केवल 10 माह का मानदेय क्यों: भामसं

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 22 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
चतुर्थ श्रेणी से क्लास-वन तक 12 माह का वेतन, तो मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को केवल 10 माह का मानदेय क्यों: भामसं

अक्तूबर 22, शिमला (हिमाचल प्रदेश): भारतीय मजदूर संघ ने मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को वर्ष के केवल 10 माह का मानदेय दिए जाने पर सवाल उठाते हुए उन्हें पूरे 12 माह का वेतन देने की मांग की है। संघ का कहना है कि शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर क्लास-वन अधिकारियों तक को 12 माह का वेतन मिलता है, जबकि स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को दो माह के मानदेय से वंचित रखा जाता है।

यह स्थिति उनके परिवारों के सामने आर्थिक कठिनाइयां खड़ी करती है। भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री यशपाल हेटा ने कहा कि मिड-डे मील कार्यकर्ता बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाले ₹3,000 4,000 के मानदेय में परिवार का खर्च चलाना बेहद कठिन है।

महंगाई के इस दौर में उनके श्रम और योगदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए। भारतीय मजदूर संघ की प्रमुख मांगें हैं जिनमें मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को 10 माह के बजाय पूरे 12 माह का वेतन दिया जाए ताकि शेष दो महीनों में भी उनके परिवारों का खर्च चलता रहे, मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को वर्तमान महंगाई और परिवार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम ₹30,000 प्रतिमाह वेतन दिया जाए, सभी पात्र कार्यकर्ताओं को भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएं, दस वर्ष से अधिक समय से सेवाएं दे रहे कार्यकर्ताओं के लिए नियमितीकरण की स्पष्ट नीति बनाई जाए।

यशपाल हेटा ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं के श्रम और जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। भारतीय मजदूर संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इन मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लेकर मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रदान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो भारतीय मजदूर संघ मिड-डे मील कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।