छठ- दीवाली से पहले फ्लाइट टिकट महंगे होना तय, लगातार तीसरे महीने बढ़े ATF के दाम
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त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हवाई सफर करने वालों के लिए अच्छी खबर नहीं है. घरेलू एयरलाइंस के लिए हवाई ईंधन यानी एटीएफ लगातार तीसरे महीने महंगा हो गया है.
इस बार एटीएफ के दाम में 13.22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. एक लीटर एटीएफ अब करीब 16 रुपये महंगा हो गया है.
बता दें कि पहले इसका दाम 121.28 रुपये प्रति लीटर था जो अब बढ़कर करीब 137 रुपये प्रति लीटर हो गया है. सवाल यह है कि इसका असर आम यात्री के टिकट पर कितना और कैसे पड़ेगा.
तीन महीने में 27 रुपये महंगा
पिछले तीन महीनों में एटीएफ के दाम तेजी से ऊपर गए हैं.
जुलाई में घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ का दाम 5 रुपये घटाकर 110 रुपये प्रति लीटर किया गया था. इसके बाद अगस्त में यह 5 रुपये बढ़कर 115 रुपये हो गया. सितंबर में 6.28 रुपये की बढ़ोतरी के साथ दाम 121.28 रुपये पहुंचा.
अब अक्टूबर में करीब 16 रुपये की बढ़ोतरी के बाद यह करीब 137 रुपये प्रति लीटर हो गया है यानी सिर्फ तीन महीने में एटीएफ करीब 27 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है.
एटीएफ क्या है और क्यों जरूरी है?
एटीएफ यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल वह ईंधन है जिससे हवाई जहाज उड़ते हैं.
जैसे गाड़ी के लिए पेट्रोल और डीजल जरूरी है वैसे ही जहाज के लिए एटीएफ. इसके बिना कोई भी उड़ान संभव नहीं है.
इसलिए जब भी एटीएफ का दाम बदलता है, तो उसका सीधा असर एयरलाइंस के खर्च पर पड़ता है.
एयरलाइंस का सबसे बड़ा खर्च क्या है?
किसी भी एयरलाइन को जहाज चलाने में कई तरह के खर्च करने पड़ते हैं.
जैसे पायलट और क्रू की सैलरी, जहाज का किराया, मेंटेनेंस, एयरपोर्ट चार्ज और ईंधन. इनमें सबसे बड़ा हिस्सा ईंधन का होता है.
भारत में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च में करीब 35 से 40 फीसदी हिस्सा सिर्फ एटीएफ का होता है. यानी अगर ईंधन महंगा होता है तो एयरलाइन का पूरा हिसाब-किताब बिगड़ जाता है.
एक उड़ान पर कितना बढ़ा खर्च?
इसे एक मोटे अनुमान से समझते हैं.
दिल्ली से मुंबई जैसी करीब दो
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar