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छठ की झांकी से जीवंत हुई बिहार की लोक संस्कृति

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
छठ की झांकी से जीवंत हुई बिहार की लोक संस्कृति

झांकी में छात्र-छात्राओं ने सूप-दउरा, ठेकुआ और छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्रियों के साथ पर्व की तैयारियों को दर्शाया।

04 नवंबर , दरभंगा (दरभंगा, बिहार): बिहार के लोक आस्था के महापर्व छठ की छटा अब विद्यालयों में भी देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में नवादा जिले के भरौसा मध्य विद्यालय में छात्र-छात्राओं ने छठ महापर्व पर आधारित एक आकर्षक और मनमोहक झांकी प्रस्तुत की। इस दौरान बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।

झांकी में छात्र-छात्राओं ने सूप-दउरा, ठेकुआ और छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्रियों के साथ पर्व की तैयारियों को दर्शाया। वहीं, अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के दृश्यों के माध्यम से छठ महापर्व की धार्मिक आस्था और परंपरा को जीवंत रूप दिया।

बच्चों की इस प्रस्तुति ने न केवल विद्यालय परिसर में छठ का उत्सवी माहौल बनाया, बल्कि बिहार की लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक भी पेश की।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और रीति-रिवाजों से जोड़ना है। साथ ही, बच्चों को अपनी संस्कृति पर गर्व करने और आने वाली पीढ़ियों तक इन परंपराओं को पहुंचाने का संदेश भी दिया गया।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।